Previous Year Question
भारत के सांस्कृतिक इतिहास के सन्दर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए :
फतेहपुर सीकरी स्थित बुलंद दरवाजा तथा खानकाह के निर्माण में सफेद संगमरमर का प्रयोग हुआ था।
लखनऊ स्थित बड़ा इमामबाड़ा और रूमी दरवाजा के निर्माण में लाल-बलुआ पत्थर और संगमरमर का प्रयोग हुआ था।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
Correct Answer: D
Detailed Solution
कथन 1 गलत है
फतेहपुर सीकरी के अधिकांश भवनों का प्रमुख निर्माण-सामग्री लाल बलुआ पत्थर था। UNESCO के अनुसार, यहाँ के भवन लाल बलुआ पत्थर से बने हैं और संगमरमर का प्रयोग सीमित मात्रा में हुआ है।
बुलंद दरवाजा मुख्यतः लाल और बादामी रंग के बलुआ पत्थर से निर्मित है। इसमें सजावट, किनारों और जड़ाई के लिए सफेद तथा काले संगमरमर का सीमित प्रयोग हुआ है।
इसलिए बुलंद दरवाजा को पूर्णतः सफेद संगमरमर का निर्माण नहीं माना जाता।
फतेहपुर सीकरी परिसर में सफेद संगमरमर से विशेष रूप से संबंधित प्रसिद्ध संरचना शेख सलीम चिश्ती का मकबरा है। खानकाह को उस सफेद संगमरमर के मकबरे के समान मानना सही नहीं है।
UPSC की आधिकारिक उत्तर-कुंजी ने इस संयुक्त कथन को गलत माना है।
कथन 2 गलत है
बड़ा इमामबाड़ा और रूमी दरवाजा अवधकालीन स्थापत्य के उदाहरण हैं। इनका निर्माण मुगल इमारतों में प्रचलित भारी लाल बलुआ पत्थर और संगमरमर के बजाय मुख्यतः लखौरी ईंटों, चूने तथा सुरखी के गारे से किया गया था।
लखनऊ जिला प्रशासन के अनुसार, रूमी दरवाजा पतली पकी हुई मिट्टी की ईंटों तथा चूने और पिसी हुई ईंट के मिश्रित गारे—लखौरी और सुरखी—से निर्मित है।
इसकी सतह पर चूने के प्लास्टर के माध्यम से सूक्ष्म फूल-पत्तियों और अन्य अलंकरणों का निर्माण किया गया था।
अतः बड़ा इमामबाड़ा और रूमी दरवाजा को लाल बलुआ पत्थर तथा संगमरमर से निर्मित बताना गलत है।