Previous Year Question
भारत के सांस्कृतिक इतिहास के संदर्भ में, इतिवृत्तों, राजवंशीय इतिहासों तथा वीरगाथाओं को कंठस्थ करना निम्नलिखित में से किसका व्यवसाय था?
Correct Answer: D
Detailed Solution
मागध पेशेवर स्तुतिगायक, वंशावलीकार और इतिवृत्त-वाचक होते थे। उनका कार्य राजवंशों की वंशावलियों, ऐतिहासिक घटनाओं, राजाओं की उपलब्धियों और वीरगाथाओं को स्मरण रखना तथा अवसर के अनुसार उनका पाठ करना था। इस प्रकार उन्होंने लिखित इतिहास के व्यापक प्रचलन से पहले मौखिक परंपरा द्वारा ऐतिहासिक और सांस्कृतिक स्मृतियों को सुरक्षित रखने में भूमिका निभाई।
यहाँ मागध शब्द को प्राचीन मगध राज्य अथवा उसके सामान्य निवासी के अर्थ में नहीं, बल्कि एक विशिष्ट पेशेवर स्तुतिगायक या वंशावली-वाचक के अर्थ में प्रयोग किया गया है। प्राचीन साहित्य में मागधों के साथ सूतों का भी उल्लेख मिलता है, जो राजाओं की वंशावलियों और वीरगाथाओं का पाठ करते थे।
अन्य विकल्प:
(a) श्रमण गृहस्थ जीवन त्यागकर तपस्या और आध्यात्मिक साधना करने वाले संन्यासी या साधक होते थे। बौद्ध और जैन परंपराएँ व्यापक श्रमण परंपरा से संबंधित थीं।
(b) परिव्राजक भ्रमणशील संन्यासी अथवा धार्मिक-दार्शनिक साधक होते थे, जो एक स्थान पर स्थायी रूप से नहीं रहते थे।
(c) अग्रहारिक का संबंध अग्रहार से था। अग्रहार सामान्यतः ब्राह्मणों अथवा धार्मिक-शैक्षणिक उद्देश्यों के लिए प्रदान किया गया कर-मुक्त भूमि-अनुदान या ग्राम होता था।