Previous Year Question
भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के वर्ष 1906 में विख्यात कलकत्ता अधिवेशन में चार संकल्प पारित किए गए थे। सूरत में 1907 में हुए कांग्रेस के अगले अधिवेशन में इन चारों संकल्पों को स्वीकार करने अथवा उन्हें अस्वीकृत करने के प्रश्न पर कांग्रेस में विभाजन हो गया था। निम्नलिखित में से कौन सा एक संकल्प इन चारों संकल्पों में नहीं था?
Correct Answer: A
Detailed Solution
विकल्प (a) सही है, क्योंकि यह उन चार विवादित संकल्पों में सम्मिलित नहीं था।
1906 के कलकत्ता अधिवेशन में जिन चार कार्यक्रम-संबंधी संकल्पों को स्वीकार किया गया था, वे थे:
स्वराज अथवा स्वशासन
स्वदेशी
बहिष्कार
राष्ट्रीय शिक्षा
इस अधिवेशन की अध्यक्षता दादाभाई नौरोजी ने की थी। उन्होंने स्वराज को कांग्रेस का लक्ष्य बताते हुए इसे ब्रिटिश साम्राज्य के स्वशासी उपनिवेशों के समान स्वशासन के अर्थ में प्रस्तुत किया।
चारों संकल्पों का अर्थ:
स्वराज: भारत के लिए स्वशासन की प्राप्ति।
स्वदेशी: भारत में निर्मित वस्तुओं का प्रयोग तथा भारतीय उद्योगों को प्रोत्साहन।
बहिष्कार: विदेशी वस्तुओं, विशेषकर ब्रिटिश वस्तुओं का बहिष्कार।
राष्ट्रीय शिक्षा: औपनिवेशिक नियंत्रण से स्वतंत्र तथा राष्ट्रीय आवश्यकताओं के अनुरूप शिक्षा-व्यवस्था।
सूरत विभाजन से संबंध:
नरमपंथी नेता बहिष्कार और स्वदेशी को मुख्यतः बंगाल तक सीमित रखना तथा आंदोलन को संवैधानिक तरीकों के भीतर रखना चाहते थे।
गरमपंथी नेता इन कार्यक्रमों को पूरे भारत में फैलाना चाहते थे।
1907 के सूरत अधिवेशन में इन प्रस्तावों, कांग्रेस की भावी नीति और अध्यक्ष के चयन को लेकर विवाद हुआ तथा कांग्रेस नरमपंथी और गरमपंथी गुटों में विभाजित हो गई।
बंगाल-विभाजन संबंधी स्पष्टता:
कांग्रेस ने 1905 के बंगाल-विभाजन का विरोध किया और उसे वापस लेने की माँग भी की थी।
चार कार्यक्रम-संबंधी संकल्पों में ‘बंगाल-विभाजन को रद्द करना’ सम्मिलित नहीं था; उसके स्थान पर चौथा संकल्प स्वराज था।
बंगाल-विभाजन वास्तव में दिसंबर 1911 में दिल्ली दरबार के अवसर पर सम्राट जॉर्ज पंचम की घोषणा द्वारा रद्द किया गया।