Previous Year Question
निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिएः
डॉ. राजेन्द्र प्रसाद ने महात्मा गांधी को चम्पारन आने तथा कृषकों की समस्या की जांच करने के लिए राजी किया।
चम्पारन जांच में आचार्य जे.बी. कृपलानी महात्मा गांधी के सहयोगियों में से एक थे।
ऊपर दिए गए कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
Correct Answer: B
Detailed Solution
कथन 1 गलत है।
गांधीजी को चम्पारन आने के लिए राजी करने वाले व्यक्ति राजकुमार शुक्ल थे, न कि डॉ. राजेन्द्र प्रसाद।
राजकुमार शुक्ल चम्पारन के नील की खेती से पीड़ित एक कृषक थे। उन्होंने 1916 के कांग्रेस के लखनऊ अधिवेशन में गांधीजी से भेंट की और लगातार आग्रह करके उनसे चम्पारन आने का वचन लिया।
शुक्ल ही गांधीजी के साथ कलकत्ता से बिहार आए और उन्हें पटना स्थित राजेन्द्र प्रसाद के घर ले गए।
उस समय राजेन्द्र प्रसाद घर पर उपस्थित नहीं थे। बाद में वे गांधीजी से जुड़े और चम्पारन आंदोलन में महत्त्वपूर्ण सहयोग दिया।
कथन 2 सही है।
गांधीजी ने मुजफ्फरपुर पहुँचने से पहले जे.बी. कृपलानी को तार भेजा था।
कृपलानी आधी रात को विद्यार्थियों के साथ गांधीजी का स्वागत करने रेलवे स्टेशन पहुँचे।
उन्होंने गांधीजी को बिहार, विशेषकर तिरहुत क्षेत्र की परिस्थितियों और उनके सामने आने वाली कठिनाइयों की जानकारी दी।
कृपलानी ने स्थानीय सम्पर्क स्थापित करने, लोगों को संगठित करने और चम्पारन जांच में गांधीजी की सहायता की।
चम्पारन का मूल मुद्दा:
‘तिनकठिया व्यवस्था’ के अंतर्गत कृषकों को अपनी भूमि के 3/20 भाग पर नील की खेती करने के लिए बाध्य किया जाता था।
गांधीजी ने किसानों के बयान और प्रमाण एकत्र किए तथा चम्पारन छोड़ने के सरकारी आदेश का उल्लंघन किया।
बाद में सरकार ने एक जांच समिति गठित की, जिसमें गांधीजी भी सदस्य थे।
इसके परिणामस्वरूप चम्पारन कृषीय अधिनियम, 1918 बना और तिनकठिया व्यवस्था समाप्त हुई।