Previous Year Question
स्वदेशी आंदोलन के प्रारंभ का तात्कालिक कारण क्या था?
Correct Answer: A
Detailed Solution
(a) सही है।
स्वदेशी आंदोलन का तात्कालिक कारण वायसराय लॉर्ड कर्जन द्वारा बंगाल का विभाजन करने का निर्णय था।
ब्रिटिश सरकार ने बंगाल के विशाल आकार को विभाजन का प्रशासनिक कारण बताया, लेकिन राष्ट्रवादियों ने इसे बंगाली एकता एवं उभरते राष्ट्रवादी आंदोलन को कमजोर करने की ‘फूट डालो और शासन करो’ नीति माना।
बंगाल-विभाजन की योजना के विरुद्ध व्यापक सभाएँ, याचिकाएँ और प्रदर्शन हुए। जब सरकार ने जनविरोध की उपेक्षा की, तो आंदोलन संवैधानिक विरोध से आगे बढ़कर बहिष्कार और स्वदेशी की ओर गया।
7 अगस्त 1905 को कलकत्ता के टाउन हॉल में हुई विशाल सभा में ब्रिटिश वस्तुओं के बहिष्कार का प्रस्ताव स्वीकार किया गया। इसे स्वदेशी एवं बहिष्कार आंदोलन का औपचारिक प्रारंभ माना जाता है।
बंगाल-विभाजन 16 अक्टूबर 1905 से प्रभावी हुआ। इस दिन को शोक-दिवस के रूप में मनाया गया। लोगों ने उपवास रखा, जुलूस निकाले और रवीन्द्रनाथ टैगोर के आह्वान पर एकता के प्रतीक के रूप में राखी बाँधी।
आंदोलन के प्रमुख कार्यक्रम थे:
ब्रिटिश एवं विदेशी वस्तुओं का बहिष्कार।
स्वदेशी वस्तुओं और भारतीय उद्योगों को प्रोत्साहन।
विदेशी कपड़ों की सार्वजनिक होली।
राष्ट्रीय शिक्षा संस्थानों की स्थापना।
आत्मनिर्भरता और निष्क्रिय प्रतिरोध का प्रचार।
सुरेन्द्रनाथ बनर्जी, विपिनचंद्र पाल, अरविन्द घोष, रवीन्द्रनाथ टैगोर और अश्विनी कुमार दत्त ने बंगाल में प्रमुख भूमिका निभाई। तिलक ने इसे महाराष्ट्र, लाला लाजपत राय ने पंजाब और वी.ओ. चिदंबरम पिल्लै ने मद्रास क्षेत्र में आगे बढ़ाया।
1906 के कलकत्ता कांग्रेस अधिवेशन ने स्वदेशी, बहिष्कार, राष्ट्रीय शिक्षा और स्वराज से संबंधित कार्यक्रमों को समर्थन दिया।
बंगाल-विभाजन 1911 में रद्द कर दिया गया, लेकिन स्वदेशी आंदोलन ने भारतीय राष्ट्रीय आंदोलन को याचिकाओं तक सीमित राजनीति से निकालकर आर्थिक प्रतिरोध और व्यापक जनभागीदारी की दिशा में आगे बढ़ाया।
(b) गलत है। तिलक को 1897 में राजद्रोह के मामले में 18 महीने के कठोर कारावास की सजा दी गई थी। यह स्वदेशी आंदोलन के 1905 में प्रारंभ होने से पहले की घटना थी और आंदोलन का तात्कालिक कारण नहीं थी। इसे 1908 में तिलक को मिले छह वर्ष के मांडले कारावास से नहीं मिलाना चाहिए।
(c) गलत है। पंजाब कोलोनाइजेशन विधेयक के विरुद्ध आंदोलन तथा लाला लाजपत राय और अजीत सिंह के विरुद्ध सरकारी कार्रवाई 1907 के पंजाब आंदोलन से संबंधित थी। यह स्वदेशी आंदोलन के प्रारंभ के लगभग दो वर्ष बाद की घटना थी।
(d) गलत है। चापेकर बंधुओं को पुणे में प्लेग कमिश्नर डब्ल्यू.सी. रैंड और लेफ्टिनेंट आयर्स्ट की हत्या से जुड़े मामले में मृत्युदंड दिया गया था। यह 1897–99 की घटनाओं से संबंधित था और स्वदेशी आंदोलन का तात्कालिक कारण नहीं था।
तिथि-स्पष्टता:
जुलाई 1905—बंगाल-विभाजन का निर्णय सार्वजनिक हुआ।
7 अगस्त 1905—कलकत्ता टाउन हॉल में बहिष्कार प्रस्ताव; आंदोलन का औपचारिक प्रारंभ।
16 अक्टूबर 1905—बंगाल-विभाजन प्रभावी हुआ।
1911—बंगाल-विभाजन रद्द किया गया।