JAGTIV · Previous Year Questions

UPSC

HISTORY · 2012

Previous Year Question

भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस का लाहौर अधिवेशन (1929) इतिहास में बहुत महत्वपूर्ण है, क्योंकि

  1. कांग्रेस ने पूर्ण स्वतंत्रता की मांग का प्रस्ताव पारित किया।

  2. उस अधिवेशन में उग्रवादियों और नरमपंथियों के बीच दरार समाप्त हो गई।

  3. उस अधिवेशन में द्वि-राष्ट्र सिद्धांत को अस्वीकार करते हुए एक प्रस्ताव पारित किया गया।

उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?

A.
केवल 1
B.
2 और 3
C.
1 और 3
D.
इनमें से कोई नहीं

Correct Answer: A

Detailed Solution

कथन 1 सही है।

दिसंबर 1929 में जवाहरलाल नेहरू की अध्यक्षता में कांग्रेस का लाहौर अधिवेशन आयोजित हुआ। इसमें कांग्रेस के संविधान में प्रयुक्त ‘स्वराज’ का अर्थ पूर्ण स्वतंत्रता—पूर्ण स्वराज घोषित किया गया। इस प्रकार कांग्रेस ने औपनिवेशिक स्वराज्य अथवा Dominion Status के स्थान पर पूर्ण स्वतंत्रता को अपना तात्कालिक लक्ष्य बनाया।

इस अधिवेशन से जुड़े महत्त्वपूर्ण तथ्य:

  • जवाहरलाल नेहरू अधिवेशन के अध्यक्ष थे।

  • रावी नदी के तट पर राष्ट्रीय ध्वज फहराया गया।

  • 26 जनवरी 1930 को देशभर में प्रथम स्वतंत्रता दिवस अथवा पूर्ण स्वराज दिवस के रूप में मनाने का निर्णय हुआ।

  • लोगों को पूर्ण स्वराज की प्रतिज्ञा दिलाई गई।

  • कांग्रेस कार्यसमिति को उचित समय पर सविनय अवज्ञा आंदोलन प्रारम्भ करने का अधिकार दिया गया।

  • इसी राजनीतिक कार्यक्रम की अगली प्रमुख कड़ी 1930 का नमक सत्याग्रह और सविनय अवज्ञा आंदोलन बनी।

कथन 2 गलत है।

नरमपंथियों और उग्रवादियों का विभाजन 1907 के सूरत अधिवेशन में हुआ था। दोनों धाराओं का पुनर्मिलन 1916 के लखनऊ अधिवेशन में हुआ, न कि 1929 के लाहौर अधिवेशन में।

कथन 3 गलत है।

लाहौर अधिवेशन, 1929 में द्वि-राष्ट्र सिद्धांत को अस्वीकार करने वाला कोई विशिष्ट प्रस्ताव पारित नहीं किया गया। इससे संबंधित प्रमुख बाद की घटना मुस्लिम लीग का लाहौर प्रस्ताव, 1940 था। अतः इसे कांग्रेस के 1929 के अधिवेशन से नहीं जोड़ना चाहिए।

कनेक्शन:

  • 1907—सूरत विभाजन

  • 1916—लखनऊ में नरमपंथी-उग्रपंथी पुनर्मिलन और कांग्रेस-लीग समझौता

  • 1929—लाहौर में पूर्ण स्वराज

  • 26 जनवरी 1930—स्वतंत्रता दिवस

  • 1930—सविनय अवज्ञा आंदोलन

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