JAGTIV · Previous Year Questions

UPSC

HISTORY · 2012

Previous Year Question

भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के दौरान, राष्ट्रीय सामाजिक सम्मेलन का गठन किया गया था। इसके गठन का क्या कारण था?

A.
बंगाल क्षेत्र के विभिन्न सामाजिक सुधार समूहों या संगठनों ने बड़े हित के मुद्दों पर चर्चा करने और सरकार के लिए उपयुक्त याचिकाएँ/अभ्यावेदन तैयार करने के लिए एकल निकाय का गठन किया।
B.
भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस अपने विचार-विमर्श में सामाजिक सुधारों को शामिल नहीं करना चाहती थी और उसने ऐसे उद्देश्य के लिए एक अलग निकाय बनाने का निर्णय लिया।
C.
बेहरामजी मालाबारी और एम. जी. रानाडे ने देश के सभी सामाजिक सुधार समूहों को एक संगठन के तहत लाने का निर्णय लिया।
D.
उपर्युक्त कथनों A), B) और C) में से कोई भी इस संदर्भ में सही नहीं है।

Correct Answer: B

Detailed Solution

भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के प्रारंभिक नेताओं में इस बात पर मतभेद था कि कांग्रेस के मंच से केवल राजनीतिक एवं प्रशासनिक सुधारों पर चर्चा की जाए अथवा सामाजिक सुधारों को भी उसके कार्यक्रम में शामिल किया जाए।

कांग्रेस नेतृत्व के एक बड़े वर्ग का मानना था कि बाल-विवाह, विधवा-पुनर्विवाह और जातिगत प्रथाओं जैसे विवादास्पद सामाजिक प्रश्नों को कांग्रेस के राजनीतिक विचार-विमर्श में शामिल करने से विभिन्न समुदायों एवं क्षेत्रों के प्रतिनिधियों में मतभेद उत्पन्न हो सकते हैं। इससे राजनीतिक एकता कमजोर होने की आशंका थी।

इसलिए सामाजिक सुधार के प्रश्नों पर चर्चा करने के लिए कांग्रेस से संगठनात्मक रूप से अलग मंच बनाया गया। इसी पृष्ठभूमि में एम.जी. रानाडे और रघुनाथ राव से संबंधित भारतीय राष्ट्रीय सामाजिक सम्मेलन अस्तित्व में आया।

इसके प्रमुख तथ्य थे:

  • इसका पहला अधिवेशन दिसंबर 1887 में मद्रास में हुआ।

  • प्रथम अधिवेशन की अध्यक्षता सर टी. माधव राव ने की।

  • यह सामान्यतः कांग्रेस के वार्षिक अधिवेशन के तुरंत बाद, उसी स्थान पर अपना अधिवेशन करता था।

  • इसे कांग्रेस आंदोलन के सामाजिक सुधार पक्ष अथवा सामाजिक सुधार प्रकोष्ठ के रूप में देखा जाता है, यद्यपि यह संगठनात्मक रूप से अलग संस्था थी।

  • इसने बाल-विवाह, विधवा-पुनर्विवाह, महिला शिक्षा, अंतरजातीय विवाह, बहुविवाह और जातिगत प्रतिबंधों जैसे विषयों पर ध्यान केंद्रित किया।

विकल्प C गलत क्यों है? बेहरामजी मालाबारी एक महत्त्वपूर्ण समाज सुधारक थे और उन्होंने बाल-विवाह तथा सहमति की आयु जैसे विषयों पर अभियान चलाया। लेकिन राष्ट्रीय सामाजिक सम्मेलन की स्थापना मुख्यतः एम.जी. रानाडे और रघुनाथ राव से संबंधित थी। उसके गठन का तत्काल कारण कांग्रेस द्वारा सामाजिक सुधारों को अपने मुख्य राजनीतिक विचार-विमर्श से अलग रखना था।

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