JAGTIV · Previous Year Questions

UPSC

HISTORY · 2012

Previous Year Question

1932 में महात्मा गांधी ने मरणपर्यंत उपवास प्रधानतया इसलिए किया कि

A.
गोलमेज सभा भारतीय राजनीतिक आकांक्षाओं को संतुष्ट करने में असफल हुई।
B.
कांग्रेस और मुस्लिम लीग में मत-भिन्नता थी।
C.
रैम्जे मैकडोनॉल्ड ने सांप्रदायिक अधिनिर्णय (कम्युनल अवॉर्ड) की घोषणा की।
D.
इस संदर्भ में उपर्युक्त A), B) और C) कथनों में से कोई भी सही नहीं है।

Correct Answer: C

Detailed Solution

ब्रिटिश प्रधानमंत्री रैम्जे मैकडोनॉल्ड ने 16 अगस्त, 1932 को सांप्रदायिक अधिनिर्णय की घोषणा की। इसमें मुसलमानों, सिखों, भारतीय ईसाइयों, एंग्लो-इंडियनों और यूरोपियनों के साथ-साथ दलित वर्गों को भी पृथक निर्वाचक मंडल प्रदान किया गया था।

महात्मा गांधी दलित वर्गों के लिए विधायिकाओं में प्रतिनिधित्व और आरक्षित सीटों के विरोधी नहीं थे। उनका विरोध विशेष रूप से उन्हें हिंदू समाज से अलग राजनीतिक समुदाय मानकर दिया गया पृथक निर्वाचक मंडल था। गांधी का मानना था कि इससे अस्पृश्यता समाप्त होने के बजाय दलित वर्गों का हिंदू समाज से स्थायी राजनीतिक पृथक्करण हो जाएगा।

इसलिए यरवदा जेल में बंद गांधी ने 20 सितंबर, 1932 को मरणपर्यंत उपवास प्रारंभ किया।

इसके बाद गांधी और डॉ. बी.आर. अम्बेडकर सहित विभिन्न नेताओं के बीच समझौता हुआ, जिसे पूना समझौता कहा जाता है। यह समझौता 24 सितंबर, 1932 को हुआ। इसके अंतर्गत:

  • दलित वर्गों के लिए पृथक निर्वाचक मंडल समाप्त कर दिया गया।

  • संयुक्त निर्वाचक मंडल के भीतर उनके लिए सीटें आरक्षित की गईं।

  • प्रांतीय विधानमंडलों में उनकी आरक्षित सीटों की संख्या सांप्रदायिक अधिनिर्णय की 71 सीटों से बढ़ाकर 148 कर दी गई।

  • गांधी ने ब्रिटिश सरकार द्वारा समझौता स्वीकार किए जाने के बाद 26 सितंबर, 1932 को अपना उपवास समाप्त किया।

इस प्रकार गांधी का उपवास गोलमेज सम्मेलन की सामान्य असफलता या कांग्रेस–मुस्लिम लीग मतभेद के कारण नहीं, बल्कि सांप्रदायिक अधिनिर्णय में दलित वर्गों के लिए प्रस्तावित पृथक निर्वाचक मंडल के विरुद्ध था।

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