Previous Year Question
निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
दादाभाई नौरोजी द्वारा भारतीय राष्ट्रीय आंदोलन के उद्देश्य में सबसे प्रभावी योगदान यह था कि उन्होंने—
अंग्रेजों द्वारा भारत के आर्थिक शोषण को उजागर किया।
प्राचीन भारतीय ग्रंथों की व्याख्या की और भारतीयों के आत्मविश्वास को बहाल किया।
किसी भी अन्य चीज से पहले सभी सामाजिक बुराइयों के उन्मूलन की आवश्यकता पर बल दिया।
ऊपर दिए गए कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
Correct Answer: A
Detailed Solution
कथन 1 सही है। दादाभाई नौरोजी का भारतीय राष्ट्रीय आंदोलन में सर्वाधिक प्रभावी योगदान ब्रिटिश शासन द्वारा किए जा रहे भारत के आर्थिक शोषण और धन-निष्कासन को व्यवस्थित रूप से उजागर करना था।
उन्होंने बताया कि भारत में उत्पन्न धन का एक बड़ा भाग निम्न माध्यमों से ब्रिटेन चला जाता था:
ब्रिटिश अधिकारियों के वेतन और पेंशन,
भारत सरकार के ‘होम चार्जेज’,
ब्रिटिश पूँजी पर ब्याज और लाभ,
अधिकारियों एवं व्यापारियों द्वारा भेजी गई निजी धनराशि,
ऐसा निर्यात जिसके बदले भारत को समतुल्य आर्थिक प्रतिफल प्राप्त नहीं होता था।
उनकी पुस्तक Poverty and Un-British Rule in India (1901) ने इस आर्थिक आलोचना को सुव्यवस्थित रूप दिया। इससे भारतीय राष्ट्रवाद को एक मजबूत आर्थिक आधार मिला और यह स्पष्ट हुआ कि भारत की गरीबी प्राकृतिक नहीं, बल्कि औपनिवेशिक नीतियों का परिणाम थी।
कथन 2 गलत है। प्राचीन भारतीय ग्रंथों की व्याख्या करना और उनके माध्यम से भारतीयों का आत्मविश्वास पुनर्स्थापित करना नौरोजी का प्रमुख राष्ट्रवादी योगदान नहीं था।
कथन 3 गलत है। नौरोजी सामाजिक सुधारों के समर्थक थे, लेकिन उन्होंने सभी सामाजिक बुराइयों के उन्मूलन को प्रत्येक राजनीतिक और आर्थिक कार्य से पहले रखने पर बल नहीं दिया। उनका विशिष्ट योगदान औपनिवेशिक आर्थिक शोषण का विश्लेषण था।
अतः केवल कथन 1 सही है।
सही विकल्प से संबंधित अतिरिक्त तथ्य:
दादाभाई नौरोजी को “Grand Old Man of India” कहा जाता है।
उन्होंने लंदन में ईस्ट इंडिया एसोसिएशन की स्थापना की।
वे 1886, 1893 और 1906 में भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के अध्यक्ष बने।
1892 में वे फिन्सबरी सेंट्रल से लिबरल पार्टी के सांसद चुने गए और ब्रिटिश संसद में निर्वाचित होने वाले प्रथम एशियाई बने।
1906 के कलकत्ता अधिवेशन में उनकी अध्यक्षता के दौरान कांग्रेस ने स्वराज को अपने लक्ष्य के रूप में स्वीकार किया।