JAGTIV · Previous Year Questions

UPSC

HISTORY · 2013

Previous Year Question

बंगाल के तेभागा किसान आन्दोलन की क्या माँग थी?

A.
जमींदारों की हिस्सेदारी को फसल के आधे भाग से कम करके एक-तिहाई करना
B.
भूमि का वास्तविक खेतीहर होने के नाते, भू-स्वामित्व कृषकों को प्रदान करना
C.
जमींदारी प्रथा का उन्मूलन तथा कृषिदासता का अन्त
D.
कृषकों के समस्त ऋणों को रद्द करना

Correct Answer: A

Detailed Solution

  1. बंगाल की परम्परागत बटाईदारी व्यवस्था में उपज का आधा भाग बटाईदार और आधा भाग भू-स्वामी अथवा जोतदार लेता था। इसे बर्गा या आधी व्यवस्था कहा जाता था।

  1. तेभागा आंदोलन की मुख्य माँग थी कि उपज के तीन भाग किए जाएँ—दो-तिहाई भाग वास्तविक खेती करने वाले बटाईदार को और एक-तिहाई भाग भू-स्वामी को मिले। इसलिए जमींदार की हिस्सेदारी आधे से घटाकर एक-तिहाई करने वाला विकल्प (a) सही है।

  1. यह 1946–47 में बंगाल के बटाईदारों—जिन्हें बरगादार या अधियार भी कहा जाता था—का आंदोलन था। इसे मुख्यतः बंगाल प्रान्तीय किसान सभा के कार्यकर्ताओं ने संगठित किया और यह बंगाल के 19 जिलों में फैला।

  1. बंगाल भूमि राजस्व आयोग अर्थात् फ्लाउड आयोग ने भी बटाईदारों को आधे के स्थान पर दो-तिहाई उपज देने की संस्तुति की थी। आंदोलनकारियों की एक अन्य व्यावहारिक माँग यह थी कि फसल को जोतदार के खलिहान के बजाय बटाईदार के अपने खलिहान में रखा और बाँटा जाए।

  1. विकल्प (b) गलत है, क्योंकि आंदोलन की केंद्रीय माँग भूमि का स्वामित्व नहीं, उपज में अधिक हिस्सा थी। विकल्प (c) भी मुख्य माँग नहीं थी, यद्यपि आंदोलन के दौरान बाद में जमींदारी उन्मूलन का नारा जोड़ा गया। विकल्प (d) के अनुसार सभी किसान ऋणों की माफी भी तेभागा आंदोलन की केंद्रीय माँग नहीं थी।

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