Previous Year Question
निम्नलिखित में से कौन, भारत में उपनिवेशवाद का/के आर्थिक आलोचक था/थे?
दादाभाई नौरोजी
जी० सुब्रमण्य अय्यर
आर० सी० दत्त
नीचे दिए गए कूट का प्रयोग कर सही उत्तर चुनिए।
Correct Answer: D
Detailed Solution
दादाभाई नौरोजी—सही: उन्होंने ब्रिटिश शासन के कारण भारत से धन के निरन्तर निष्कासन को “धन-निकास सिद्धान्त” के माध्यम से समझाया। उनकी प्रसिद्ध पुस्तक Poverty and Un-British Rule in India में बताया गया कि अधिकारियों के वेतन-पेंशन, ब्रिटिश पूँजी के लाभ, ब्याज और “होम चार्जेज़” के रूप में भारतीय धन बिना समतुल्य आर्थिक प्रतिफल के ब्रिटेन भेजा जाता था। उन्होंने इस निकास को भारत की गरीबी का प्रमुख कारण माना।
जी० सुब्रमण्य अय्यर—सही: वे राष्ट्रवादी पत्रकार, The Hindu के संस्थापकों में से एक तथा तमिल समाचार-पत्र Swadesamitran के संस्थापक थे। उन्होंने पत्रकारिता के माध्यम से औपनिवेशिक भू-राजस्व व्यवस्था, भारतीय गरीबी, ब्रिटेन के पक्ष में असमान मुक्त-व्यापार नीति और भारतीय उद्योगों की उपेक्षा की आलोचना की। उन्होंने स्वदेशी और भारतीय औद्योगिक विकास का समर्थन किया।
आर० सी० दत्त—सही: वे पूर्व भारतीय सिविल सेवा अधिकारी और आर्थिक इतिहासकार थे। उनकी प्रमुख कृतियों The Economic History of India under Early British Rule तथा India in the Victorian Age में अत्यधिक भू-राजस्व, भारतीय हस्तशिल्प के पतन, प्रतिकूल व्यापार नीतियों, अकालों और धन-निकास का विश्लेषण किया गया। उन्होंने दिखाया कि औपनिवेशिक नीतियों ने भारतीय कृषि एवं उद्योग दोनों को कमजोर किया।
इन आर्थिक राष्ट्रवादियों ने यह स्थापित किया कि भारत की गरीबी प्राकृतिक या आकस्मिक नहीं थी, बल्कि औपनिवेशिक आर्थिक नीतियों का परिणाम थी। उनकी आर्थिक आलोचना ने प्रारम्भिक भारतीय राष्ट्रवाद को मजबूत वैचारिक आधार प्रदान किया।
अतः तीनों व्यक्ति उपनिवेशवाद के आर्थिक आलोचक थे और सही उत्तर (d) 1, 2 और 3 है।