Previous Year Question
वर्ष 1907 में सूरत में भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के विभाजन का मुख्य कारण क्या था?
Correct Answer: B
Detailed Solution
सूरत विभाजन का मूल कारण नरमपंथियों और चरमपंथियों के बीच विचारधारा, संघर्ष की पद्धति और ब्रिटिश सरकार के प्रति दृष्टिकोण का अंतर था। चरमपंथियों को नरमपंथियों की संवैधानिक वार्ता और प्रार्थना-याचिका की पद्धति से प्रभावी परिणाम मिलने पर विश्वास नहीं था।
नरमपंथी नेता प्रार्थना-पत्र, प्रस्ताव, प्रतिनिधिमंडल और संवैधानिक वार्ता के माध्यम से क्रमिक सुधार प्राप्त करना चाहते थे। दूसरी ओर, चरमपंथी स्वदेशी, बहिष्कार, राष्ट्रीय शिक्षा, निष्क्रिय प्रतिरोध और जन-सक्रियता के माध्यम से स्वराज की दिशा में आगे बढ़ना चाहते थे।
1906 के कलकत्ता कांग्रेस अधिवेशन में दादाभाई नौरोजी की अध्यक्षता में स्वराज, स्वदेशी, बहिष्कार और राष्ट्रीय शिक्षा से संबंधित प्रस्ताव स्वीकार किए गए थे। अगले वर्ष नरमपंथी इन प्रस्तावों, विशेष रूप से बहिष्कार, को सीमित या कमजोर करना चाहते थे, जिसका चरमपंथियों ने विरोध किया।
1907 का अधिवेशन पहले नागपुर में होना था, लेकिन बाद में इसे नरमपंथियों के प्रभाव वाले सूरत में स्थानांतरित कर दिया गया। नरमपंथियों ने रासबिहारी घोष को अध्यक्ष बनाना चाहा, जबकि चरमपंथी लाला लाजपत राय को अध्यक्ष बनाना चाहते थे। लाजपत राय ने स्वयं अध्यक्ष पद की प्रतिस्पर्धा से हटने का निर्णय लिया।
चरमपंथी चाहते थे कि कलकत्ता अधिवेशन में स्वीकार किए गए स्वराज, स्वदेशी, बहिष्कार और राष्ट्रीय शिक्षा के प्रस्तावों की पुनः पुष्टि हो। विवाद के दौरान बाल गंगाधर तिलक को बोलने से रोका गया, जिसके बाद अधिवेशन में अव्यवस्था फैल गई और कांग्रेस नरमपंथी तथा चरमपंथी गुटों में विभाजित हो गई।
मुस्लिम लीग की स्थापना और लॉर्ड मिन्टो की सांप्रदायिक राजनीति उस काल की महत्त्वपूर्ण घटनाएँ थीं, लेकिन वे सूरत विभाजन का प्रत्यक्ष मुख्य कारण नहीं थीं। अध्यक्ष पद का विवाद अरविंद घोष की उम्मीदवारी से संबंधित नहीं था। इसलिए (a), (c) और (d) सही नहीं हैं।