JAGTIV · Previous Year Questions

UPSC

HISTORY · 2018

Previous Year Question

निम्नलिखित में से कौन-सा एक चम्पारण सत्याग्रह का अति महत्वपूर्ण पहलू है?

A.
राष्ट्रीय आंदोलन में अखिल भारतीय स्तर पर अधिवक्ताओं, विद्यार्थियों और महिलाओं की सक्रिय सहभागिता
B.
राष्ट्रीय आंदोलन में भारत के दलित और आदिवासी समुदायों की सक्रिय भागीदारी
C.
भारत के राष्ट्रीय आंदोलन में किसान असंतोष का सम्मिलित होना
D.
रोपण फसलों तथा वाणिज्यिक फसलों की खेती में भारी गिरावट

Correct Answer: C

Detailed Solution

  1. चम्पारण सत्याग्रह का सबसे महत्वपूर्ण पहलू स्थानीय किसानों के असंतोष को भारत के व्यापक राष्ट्रीय आंदोलन से जोड़ना था। इसके माध्यम से ग्रामीण किसान औपनिवेशिक शासन के विरुद्ध संगठित राष्ट्रीय राजनीति से जुड़े। इसलिए विकल्प (c) सही है।

  1. चम्पारण के किसानों को यूरोपीय नील बागान-मालिकों द्वारा तिनकठिया व्यवस्था के अंतर्गत अपनी भूमि के 3/20 भाग पर नील उगाने के लिए बाध्य किया जाता था। किसानों को कम भुगतान, अवैध करों और बागान-मालिकों के विभिन्न अत्याचारों का सामना करना पड़ता था।

  1. चम्पारण के नील उत्पादक किसान राजकुमार शुक्ल ने गांधीजी को किसानों की समस्याओं की जाँच करने के लिए चम्पारण आने हेतु राजी किया। गांधीजी अप्रैल 1917 में चम्पारण पहुँचे। जिला छोड़ने के सरकारी आदेश का उल्लंघन करने पर उनके विरुद्ध मुकदमा चलाया गया, किंतु किसानों के भारी समर्थन के बाद सरकार ने मुकदमा वापस ले लिया।

  1. सरकार ने एक औपचारिक चम्पारण जाँच समिति गठित की, जिसमें गांधीजी को भी सदस्य बनाया गया। समिति की सिफारिशों के आधार पर तिनकठिया व्यवस्था समाप्त की गई और चम्पारण कृषीय अधिनियम, 1918 ने बलपूर्वक नील की खेती की व्यवस्था को समाप्त करने का वैधानिक आधार प्रदान किया।

  1. अधिवक्ताओं और विद्यार्थियों ने आंदोलन में सहायता की थी, लेकिन यह महिलाओं सहित उनका अखिल भारतीय आंदोलन नहीं था; इसलिए (a) सही नहीं है। यह मुख्यतः दलित या आदिवासी आंदोलन भी नहीं था, इसलिए (b) गलत है। इसका उद्देश्य सभी रोपण और वाणिज्यिक फसलों की खेती में भारी गिरावट लाना नहीं, बल्कि नील की बाध्यकारी खेती और बागान-मालिकों के अत्याचारों को समाप्त करना था; इसलिए (d) भी गलत है।

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