Previous Year Question
आर्थिक तौर पर, 19वीं शताब्दी में भारत पर अंग्रेज़ी शासन का एक परिणाम था
Correct Answer: C
Detailed Solution
विकल्प (c) सही है—भारतीय कृषि का वाणिज्यीकरण।
कृषि के वाणिज्यीकरण का अर्थ था कि फसलों का उत्पादन किसान की स्थानीय अथवा पारिवारिक आवश्यकताओं के स्थान पर मुख्यतः बाजार, औपनिवेशिक उद्योगों और निर्यात के लिए किया जाने लगा।
ब्रिटिश भू-राजस्व व्यवस्था में लगान सामान्यतः नकद में देना पड़ता था। इसलिए किसानों को बाजार में बेची जा सकने वाली नकदी फसलें उगाने के लिए प्रेरित अथवा विवश किया गया।
कपास, नील, जूट, अफीम, चाय और गन्ना जैसी व्यावसायिक फसलों का विस्तार हुआ। रेलवे, बंदरगाह और संचार व्यवस्था ने इन फसलों को निर्यात केंद्रों तक पहुँचाना आसान बनाया।
19वीं शताब्दी में औपनिवेशिक भारत क्रमशः कृषि उत्पादों और कच्चे माल का निर्यातक तथा ब्रिटेन में निर्मित वस्तुओं का आयातक बन गया।
यह वाणिज्यीकरण कृषि के आधुनिकीकरण या किसान की समृद्धि के समान नहीं था। निर्यात-मांग और कीमतों में उतार-चढ़ाव, ऋण तथा ऊँचे भू-राजस्व का जोखिम मुख्यतः भारतीय किसान को उठाना पड़ता था।
विकल्प (a) गलत है। भारतीय हस्तशिल्पों का निर्यात बढ़ने के बजाय ब्रिटिश मशीन-निर्मित वस्तुओं और भेदभावपूर्ण व्यापारिक नीतियों के कारण भारतीय वस्त्र एवं हस्तशिल्प उद्योगों का पतन हुआ।
विकल्प (b) गलत है। 19वीं शताब्दी में कुछ भारतीय स्वामित्व वाले आधुनिक कारखाने अवश्य स्थापित हुए, लेकिन उनकी संख्या में व्यापक वृद्धि ब्रिटिश शासन का प्रमुख आर्थिक परिणाम नहीं थी।
विकल्प (d) गलत है। कुछ बंदरगाह और औपनिवेशिक नगर विकसित हुए, लेकिन 19वीं शताब्दी के भारत की सामान्य विशेषता नगरीय जनसंख्या में तीव्र वृद्धि नहीं थी। हस्तशिल्पों के पतन के कारण अनेक कारीगर ग्रामीण क्षेत्रों और कृषि की ओर लौटे।