Previous Year Question
भारत में ब्रिटिश औपनिवेशिक शासन के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए :
महात्मा गांधी ‘गिरमिटिया (इंडेंचर्ड लेबर)’ प्रणाली के उन्मूलन में सहायक थे।
लॉर्ड चेम्सफोर्ड की ‘वॉर कॉन्फ़रेंस’ में महात्मा गांधी ने विश्व युद्ध के लिए भारतीयों की भर्ती से संबंधित प्रस्ताव का समर्थन नहीं किया था।
भारत के लोगों द्वारा नमक कानून तोड़े जाने के परिणामस्वरूप, औपनिवेशिक शासकों द्वारा भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस को अवैध घोषित कर दिया गया था।
उपर्युक्त में से कौन-से कथन सही हैं?
Correct Answer: B
Detailed Solution
कथन 1 सही है।
गिरमिटिया प्रणाली में भारतीय मजदूरों को निश्चित अवधि के अनुबंध के अंतर्गत दक्षिण अफ्रीका, फिजी, मॉरीशस तथा कैरेबियाई उपनिवेशों में काम करने के लिए भेजा जाता था।
‘गिरमिट’ शब्द अंग्रेजी के Agreement शब्द का प्रचलित रूप था।
गांधीजी ने दक्षिण अफ्रीका में गिरमिटिया मजदूरों की अमानवीय परिस्थितियों के विरुद्ध संघर्ष किया। भारत लौटने के बाद उन्होंने 1917 में इस प्रणाली के विरुद्ध देशव्यापी अभियान चलाया और बम्बई, कराची तथा कलकत्ता में जनसभाएँ कीं।
गांधीजी तथा अन्य भारतीय नेताओं के दबाव के परिणामस्वरूप 1917 में भारत से गिरमिटिया मजदूरों की भर्ती और उनके प्रवासन को समाप्त कर दिया गया। इसलिए गांधीजी इसके उन्मूलन में सहायक थे।
कथन 2 गलत है।
लॉर्ड चेम्सफोर्ड ने प्रथम विश्व युद्ध के दौरान 27 अप्रैल, 1918 को दिल्ली में वॉर कॉन्फ़रेंस बुलाई थी।
गांधीजी ने भारतीयों की भर्ती से संबंधित प्रस्ताव का विरोध नहीं किया, बल्कि उसका समर्थन किया था।
इसके बाद उन्होंने खेड़ा क्षेत्र में सेना के लिए रंगरूटों की भर्ती के पक्ष में भाषण दिए और लोगों से युद्ध सेवा में भर्ती होने की अपील की। अतः कथन में प्रयुक्त “समर्थन नहीं किया था” तथ्यात्मक रूप से गलत है।
कथन 3 सही है।
गांधीजी ने 6 अप्रैल, 1930 को दांडी में नमक बनाकर नमक कानून का उल्लंघन किया। इससे सविनय अवज्ञा आंदोलन प्रारंभ हुआ।
देश के विभिन्न भागों में हजारों लोगों ने नमक कानून और अन्य औपनिवेशिक कानूनों का उल्लंघन किया।
औपनिवेशिक सरकार ने कांग्रेस नेताओं को गिरफ्तार किया और दमनात्मक अध्यादेश लागू किए। 1932 के दमनचक्र के दौरान भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस को अवैध घोषित कर दिया गया तथा सभाओं, प्रदर्शनों और बहिष्कारों को रोकने के लिए प्रतिबंध लगाए गए।