Previous Year Question
स्वतंत्र भारत में भूमि सुधारों के संदर्भ में, निम्नलिखित में से कौन-सा कथन सही है?
Correct Answer: B
Detailed Solution
विकल्प (b) सही है।
यहाँ महत्त्वपूर्ण शब्द “प्रमुख उद्देश्य” है। इसका अर्थ यह नहीं है कि प्रत्येक भूमिहीन व्यक्ति को वास्तव में भूमि मिल गई, बल्कि भूमिहीनों और अल्पभूमिधारकों को कृषि भूमि उपलब्ध कराना भूमि सुधारों का एक प्रमुख नीतिगत उद्देश्य था।
भूमि सुधारों के प्रमुख घटक थे:
जमींदारों एवं अन्य बिचौलियों का उन्मूलन।
काश्तकारी सुधार—लगान का नियमन और काश्तकारों को सुरक्षा।
भूमि पर अधिकतम सीमा निर्धारित करना।
सीमा से अधिक अधिशेष भूमि का अधिग्रहण और भूमिहीनों में वितरण।
जोतों की चकबंदी तथा भू-अभिलेखों में सुधार।
“जोतने वाले को भूमि” के सिद्धान्त को बढ़ावा देना।
सरकार द्वारा 2004 में दिए गए आँकड़ों के अनुसार, लगभग 73.67 लाख एकड़ भूमि अधिशेष घोषित की गई थी; इसमें से 54.03 लाख एकड़ भूमि लगभग 57.46 लाख ग्रामीण गरीबों को वितरित की गई थी। इससे भूमि सुधारों के पुनर्वितरण संबंधी उद्देश्य की पुष्टि होती है।
विकल्प (a) गलत है: भूमि-हदबंदी संबंधी कानून केवल पारिवारिक जोतों तक सीमित नहीं थे। अलग-अलग राज्यों के कानूनों में व्यक्ति अथवा परिवार—दोनों को हदबंदी की इकाई बनाया गया। इसलिए “न कि व्यक्तिगत जोत पर” कहना गलत है।
विकल्प (c) गलत है: नकदी फसलों की खेती में वृद्धि मुख्यतः कृषि के व्यावसायीकरण, बाजार की माँग, सिंचाई, ऋण, तकनीक और अन्य कृषि निवेशों से संबंधित थी। इसे भूमि सुधारों का प्रत्यक्ष परिणाम नहीं माना जा सकता।
विकल्प (d) गलत है: विभिन्न राज्यों के भूमि-हदबंदी कानूनों में कुछ श्रेणियों को शर्तों के साथ छूट दी गई थी। उदाहरण के लिए, कुछ कानूनों में बागान भूमि तथा कुछ संस्थागत जोतों के लिए छूट का प्रावधान था। अतः “किसी भी प्रकार की छूट नहीं” वाला कथन पूर्णतः गलत है।