JAGTIV · Previous Year Questions

UPSC

HISTORY · 2012

Previous Year Question

ब्रह्म समाज के बारे में, निम्नलिखित में से कौन-सा/से कथन सही है/हैं?

  1. इसने मूर्तिपूजा का विरोध किया।

  2. धार्मिक ग्रंथों की व्याख्या के लिए इसने पुरोहित वर्ग को अस्वीकारा।

  3. इसने इस सिद्धान्त का प्रचार किया कि वेद त्रुटिहीन हैं।

निम्नलिखित कूटों के आधार पर सही उत्तर चुनिए :

A.
केवल 1
B.
केवल 1 और 2
C.
केवल 3
D.
1, 2 और 3

Correct Answer: B

Detailed Solution

पृष्ठभूमि और भूमिकाएँ

  • राजा राममोहन राय: उन्होंने 1828 में कलकत्ता में ब्रह्म सभा की स्थापना की, जो आगे चलकर ब्रह्म समाज के नाम से प्रसिद्ध हुई।

  • देवेन्द्रनाथ टैगोर: वे संस्थापक नहीं थे। उन्होंने 1843 के बाद आंदोलन को नया संगठनात्मक और वैचारिक नेतृत्व दिया।

  • केशवचन्द्र सेन: वे भी संस्थापक नहीं, बल्कि ब्रह्म समाज के बाद के प्रमुख नेता थे।

कथन 1—सही

ब्रह्म समाज एक निराकार ईश्वर की उपासना का समर्थक था। उसने मूर्तिपूजा, अंधविश्वास और निरर्थक धार्मिक कर्मकांडों का विरोध किया।

कथन 2—सही

ब्रह्म समाज के अनुसार धार्मिक ग्रंथों को समझने के लिए किसी वंशानुगत पुरोहित वर्ग की मध्यस्थता आवश्यक नहीं थी। प्रत्येक व्यक्ति अपनी बुद्धि और विवेक से धार्मिक सिद्धान्तों की सत्यता पर विचार कर सकता था।

कथन 3—गलत

ब्रह्म समाज ने वेदों को त्रुटिहीन या अंतिम धार्मिक प्रामाणिकता वाला ग्रंथ नहीं माना। विशेष रूप से देवेन्द्रनाथ टैगोर ने वैदिक ग्रंथों की त्रुटिहीनता के सिद्धान्त को अस्वीकार किया था।

वेदों को त्रुटिहीन मानने और उनकी सर्वोच्च प्रामाणिकता का प्रचार करने का संबंध मुख्यतः स्वामी दयानन्द सरस्वती द्वारा स्थापित आर्य समाज से था, ब्रह्म समाज से नहीं।

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