JAGTIV · Previous Year Questions

UPSC

HISTORY · 2018

Previous Year Question

संथाल विद्रोह के शांत हो जाने के बाद, औपनिवेशिक शासन द्वारा कौन-सा/से उपाय किया गया/किए गए?

  1. ‘संथाल परगना’ नामक राज्यक्षेत्रों का सृजन किया गया।

  2. किसी संथाल का गैर-संथाल को भूमि अंतरण करना गैरकानूनी हो गया।

नीचे दिए गए कूट का प्रयोग कर सही उत्तर चुनिए:

A.
केवल 1
B.
केवल 2
C.
1 और 2 दोनों
D.
न तो 1, न ही 2

Correct Answer: C

Detailed Solution

ऐतिहासिक पृष्ठभूमि: संथाल विद्रोह अथवा संथाल हूल 1855–1856 में हुआ। इसके प्रमुख नेता सिद्धू मुर्मू और कान्हू मुर्मू थे; चाँद और भैरव मुर्मू भी इसके नेतृत्व से जुड़े थे। विद्रोह महाजनों, जमींदारों, पुलिस-राजस्व अधिकारियों और उन्हें संरक्षण देने वाली औपनिवेशिक व्यवस्था के विरुद्ध था।

कथन 1 सही है।

  • औपनिवेशिक सरकार ने अधिनियम संख्या XXXVII, 1855 के माध्यम से संथाल-बहुल क्षेत्र को सामान्य कानूनों और विनियमों के संचालन से अलग किया।

  • इन क्षेत्रों को एक अलग गैर-विनियमित प्रशासनिक क्षेत्र के रूप में संगठित किया गया, जिसे संथाल परगना कहा गया।

  • इसलिए यह सरकार द्वारा किया गया प्रशासनिक पुनर्गठन था; सिद्धू-कान्हू इसके संस्थापक अथवा प्रशासक नहीं थे—वे विद्रोह के नेता थे।

कथन 2 सही है।

  • संथालों की भूमि का महाजनों और अन्य बाहरी व्यक्तियों द्वारा अधिग्रहण विद्रोह का प्रमुख कारण था।

  • विद्रोह के बाद विकसित विशेष भू-व्यवस्था ने संथाल भूमि के गैर-संथालों को अंतरण पर रोक लगाई।

  • यह स्पष्ट करना आवश्यक है कि दोनों उपाय एक ही दिन अथवा एक ही अधिनियम से लागू नहीं हुए। संथाल परगना का प्रशासनिक गठन 1855 में हुआ, जबकि भूमि-अंतरण संबंधी प्रतिबंध बाद के सेटलमेंट और काश्तकारी विनियमों—विशेषकर 1872 के विनियम तथा उसके बाद के संशोधनों—के माध्यम से विकसित और मजबूत हुए।

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