Previous Year Question
संथाल विद्रोह के शांत हो जाने के बाद, औपनिवेशिक शासन द्वारा कौन-सा/से उपाय किया गया/किए गए?
‘संथाल परगना’ नामक राज्यक्षेत्रों का सृजन किया गया।
किसी संथाल का गैर-संथाल को भूमि अंतरण करना गैरकानूनी हो गया।
नीचे दिए गए कूट का प्रयोग कर सही उत्तर चुनिए:
Correct Answer: C
Detailed Solution
ऐतिहासिक पृष्ठभूमि: संथाल विद्रोह अथवा संथाल हूल 1855–1856 में हुआ। इसके प्रमुख नेता सिद्धू मुर्मू और कान्हू मुर्मू थे; चाँद और भैरव मुर्मू भी इसके नेतृत्व से जुड़े थे। विद्रोह महाजनों, जमींदारों, पुलिस-राजस्व अधिकारियों और उन्हें संरक्षण देने वाली औपनिवेशिक व्यवस्था के विरुद्ध था।
कथन 1 सही है।
औपनिवेशिक सरकार ने अधिनियम संख्या XXXVII, 1855 के माध्यम से संथाल-बहुल क्षेत्र को सामान्य कानूनों और विनियमों के संचालन से अलग किया।
इन क्षेत्रों को एक अलग गैर-विनियमित प्रशासनिक क्षेत्र के रूप में संगठित किया गया, जिसे संथाल परगना कहा गया।
इसलिए यह सरकार द्वारा किया गया प्रशासनिक पुनर्गठन था; सिद्धू-कान्हू इसके संस्थापक अथवा प्रशासक नहीं थे—वे विद्रोह के नेता थे।
कथन 2 सही है।
संथालों की भूमि का महाजनों और अन्य बाहरी व्यक्तियों द्वारा अधिग्रहण विद्रोह का प्रमुख कारण था।
विद्रोह के बाद विकसित विशेष भू-व्यवस्था ने संथाल भूमि के गैर-संथालों को अंतरण पर रोक लगाई।
यह स्पष्ट करना आवश्यक है कि दोनों उपाय एक ही दिन अथवा एक ही अधिनियम से लागू नहीं हुए। संथाल परगना का प्रशासनिक गठन 1855 में हुआ, जबकि भूमि-अंतरण संबंधी प्रतिबंध बाद के सेटलमेंट और काश्तकारी विनियमों—विशेषकर 1872 के विनियम तथा उसके बाद के संशोधनों—के माध्यम से विकसित और मजबूत हुए।