JAGTIV · Previous Year Questions

UPSC

HISTORY · 2017

Previous Year Question

1929 का व्यापार विवाद अधिनियम (ट्रेड डिस्प्यूट्स एक्ट) निम्नलिखित में से किसका उपबंध करता है ?

A.
उद्योगों के प्रबंधन में कामगारों की भागीदारी
B.
औद्योगिक झगड़ों के दमन के लिए प्रबंधन के पास मनमानी करने की शक्ति
C.
व्यापार विवाद की स्थिति में ब्रिटिश न्यायालय द्वारा हस्तक्षेप
D.
अधिकरणों (ट्रिब्यूनल्स) की प्रणाली तथा हड़तालों पर रोक

Correct Answer: D

Detailed Solution

विकल्प (d) सही है। Trade Disputes Act, 1929 को 12 अप्रैल 1929 को Governor-General की assent मिली। Act के मूल उद्देश्य में trade disputes की जाँच और समाधान के लिए वैधानिक व्यवस्था बनाना शामिल था। इसके तहत सरकार किसी विवाद से संबंधित मामले को Court of Inquiry को और पूरे विवाद को Board of Conciliation को भेज सकती थी।

लेकिन “हड़तालों पर रोक” को पूर्ण प्रतिबंध नहीं समझना चाहिए। Act ने प्रत्येक strike को illegal नहीं बनाया था। Section 15 के तहत public utility services में contract के उल्लंघन के साथ strike करने से पहले निर्धारित notice आवश्यक था; बिना आवश्यक notice के strike दंडनीय थी। Employer के lock-out पर भी समान प्रकार की notice restriction लागू थी।

इसके अतिरिक्त Section 16 ने कुछ विशेष strikes और lock-outs को illegal घोषित किया। इसमें ऐसी कार्रवाई शामिल थी जिसका उद्देश्य संबंधित trade/industry के trade dispute को आगे बढ़ाना न हो और जो community को व्यापक एवं लंबे समय तक hardship देकर Government को किसी कार्रवाई के लिए मजबूर करने के उद्देश्य से की गई हो। इसलिए historical language में सही बात है—Act ने strike के अधिकार पर गंभीर restrictions लगाईं और कुछ प्रकार की strikes को illegal बनाया; उसने सभी strikes पर blanket ban नहीं लगाया।

विकल्प (a) गलत है, क्योंकि workers को industries के management में participation देने का प्रावधान इस Act का हिस्सा नहीं था।

विकल्प (b) गलत है, क्योंकि Act ने management को industrial disputes दबाने के लिए unlimited या arbitrary powers नहीं दीं; इसके बजाय statutory inquiry/conciliation machinery बनाई।

विकल्प (c) भी गलत है। Act में Court of Inquiry था, लेकिन इसे सामान्य “British Court” द्वारा trade dispute में हस्तक्षेप समझना गलत होगा। यह Act के अंतर्गत गठित एक विशेष inquiry body थी। 1929 Act स्वयं “Court” को Court of Inquiry constituted under this Act के रूप में परिभाषित करता था।

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