Previous Year Question
मुगल भारत के संदर्भ में, जागीरदार और ज़मींदार के बीच क्या अंतर है/हैं?
जागीरदारों के पास न्यायिक और पुलिस दायित्वों के एवज़ में भूमि आवंटनों का अधिकार होता था, जबकि ज़मींदारों के पास राजस्व अधिकार होते थे तथा उन पर राजस्व उगाही को छोड़कर अन्य कोई दायित्व पूरा करने की बाध्यता नहीं होती थी।
जागीरदारों को किये गए भूमि आवंटन वंशानुगत होते थे और ज़मींदारों के राजस्व अधिकार वंशानुगत नहीं होते थे।
नीचे दिये गए कूट का प्रयोग कर सही उत्तर चुनिये।
Correct Answer: D
Detailed Solution
कथन 1 गलत है। मुगल प्रशासन में अधिकांश मनसबदारों को उनके वेतन के बदले किसी क्षेत्र से निर्धारित राजस्व प्राप्त करने का अधिकार दिया जाता था, जिसे जागीर कहा जाता था। जागीरदार उस भूमि का मालिक नहीं बनता था; उसे मुख्यतः निर्धारित राजस्व वसूल करने का अधिकार मिलता था।
दूसरी ओर ज़मींदार केवल राजस्व वसूलने वाले अधिकारी नहीं थे। वे ग्रामीण समाज के स्थानीय भू-अधिकार संपन्न वर्ग थे। उनके पास अपनी मिल्कियत (milkiyat) भूमि हो सकती थी, जिसे वे बेच, गिरवी रख या उत्तराधिकार में दे सकते थे। वे राज्य के लिए खिदमत (सेवाएँ) भी करते थे और उनके पास सैन्य संसाधन भी होते थे। आइन-ए-अकबरी में ज़मींदारों की बड़ी संयुक्त घुड़सवार और पैदल सैन्य शक्ति का उल्लेख मिलता है। इसलिए यह कहना गलत है कि राजस्व-संग्रह के अतिरिक्त उनका कोई अन्य दायित्व नहीं था।
कथन 2 भी गलत है। सामान्य तनख्वाह-जागीरें वंशानुगत नहीं थीं। जागीरदारों का स्थानांतरण प्रायः तीन-चार वर्ष के अंतराल पर किया जाता था, जिससे वे किसी क्षेत्र में स्थायी स्थानीय शक्ति न बना सकें। इसके विपरीत ज़मींदारी अधिकार सामान्यतः वंशानुगत प्रकृति के थे।
एक अपवाद ध्यान रखने योग्य है—वतन-जागीर जैसे कुछ विशेष प्रकार वंशानुगत हो सकते थे; लेकिन सामान्य मनसबदारी तनख्वाह-जागीर के लिए यह नियम नहीं था।