Previous Year Question
मियाँ तानसेन के संदर्भ में, निम्नलिखित में से कौन-सा कथन सही नहीं है?
Correct Answer: A
Detailed Solution
विकल्प (a) सही नहीं है। तानसेन का नाम अकबर के दरबार में आने से पहले ही उनके साथ जुड़ा हुआ था। संगीत-इतिहास की परंपरा में ‘तानसेन’ की उपाधि ग्वालियर के राजा विक्रमजीत से संबंधित मानी जाती है, जबकि अकबर ने उन्हें सम्मानसूचक ‘मियाँ’ की उपाधि दी; इसी कारण वे आगे चलकर मियाँ तानसेन के नाम से प्रसिद्ध हुए।
तानसेन अकबर के दरबार में आने से पहले रीवा के राजा रामचन्द्र के आश्रय में थे। लगभग 1562 ई. में वे अकबर के दरबार में आए और मुगल दरबार के सर्वाधिक प्रतिष्ठित संगीतज्ञों में सम्मिलित हुए। अकबर के समकालीन अबुल फ़ज़ल ने भी तानसेन को अपने समय के असाधारण संगीतज्ञ के रूप में वर्णित किया है।
विकल्प (b) सही है। तानसेन ध्रुपद गायकी के महान प्रतिनिधि थे। उनकी रचनाओं में गणेश, शिव, पार्वती और राम जैसे हिन्दू देवी-देवताओं से संबंधित ध्रुपद भी मिलते हैं।
विकल्प (c) सही है। तत्कालीन दरबारी संगीत-परंपरा के अनुरूप तानसेन ने अपने राजकीय संरक्षकों की प्रशंसा में भी रचनाएँ कीं।
विकल्प (d) भी सही माना जाता है। हिन्दुस्तानी संगीत-परंपरा तानसेन को अनेक रागों के निर्माण अथवा परिष्कार का श्रेय देती है। मियाँ की तोड़ी, मियाँ की मल्हार, मियाँ की सारंग और दरबारी कान्हड़ा जैसे राग विशेष रूप से उनकी परंपरा से जुड़े हैं।