Previous Year Question
मध्यकालीन भारत के धार्मिक इतिहास के संदर्भ में, सूफी फकीरों (रहस्यवादियों) को निम्नलिखित में से कौन-सी प्रथाएँ अपनाने के लिए जाना जाता था?
ध्यान और श्वास पर नियंत्रण
एकांत स्थान पर कठोर तपस्यापूर्ण अभ्यास
अपने श्रोताओं में परमानंद की स्थिति उत्पन्न करने के लिए पवित्र गीतों का पाठ
नीचे दिए गए कूटों का उपयोग करके सही उत्तर चुनिए :
Correct Answer: D
Detailed Solution
कथन 1 सही है। सूफी साधना में ध्यान, ईश्वर-स्मरण और श्वास-नियंत्रण का प्रयोग किया जाता था। NCERT सूफी प्रशिक्षण की विधियों में ज़िक्र, चिंतन, समा, नृत्य और breath control का स्पष्ट उल्लेख करती है। भारतीय चिश्ती परंपरा में भी इसका प्रमाण मिलता है—निजामुद्दीन औलिया ने योगियों से संपर्क के दौरान श्वास-संबंधी योगाभ्यास अपनाए, जिसके कारण उन्हें कुछ योगी ‘सिद्ध’ तक कहते थे।
कथन 2 सही है। सूफी साधना में एकांतवास और कठोर तपस्या भी प्रचलित थी। इसे प्रायः ख़लवत/चिल्ला कहा जाता था। चिल्ला में साधक एक निश्चित अवधि—परंपरागत रूप से लगभग 40 दिन—एकांत में रहकर उपवास, प्रार्थना, ध्यान और कठोर आध्यात्मिक अनुशासन करता था। भारतीय चिश्ती परंपरा में भी ऐसे एकांत साधना-स्थलों के प्रमाण मिलते हैं; दिल्ली में निजामुद्दीन औलिया से संबंधित Chillah इसका पुरातात्त्विक उदाहरण है।
कथन 3 भी सही है। सूफियों, विशेषकर चिश्ती संतों में समा (Sama) अर्थात् आध्यात्मिक संगीत और पवित्र काव्य सुनने की परंपरा महत्वपूर्ण थी। इसका उद्देश्य भक्त के भीतर गहन आध्यात्मिक भाव अथवा वज्द—परमानंद/आध्यात्मिक उन्मेष उत्पन्न करना था। यह बात केवल बाद की पुस्तकों में नहीं मिलती; अमीर हसन सिज्जी द्वारा संकलित निजामुद्दीन औलिया के ‘फवाइद-उल-फुआद’ में समा, उसके श्रोताओं और उससे उत्पन्न आध्यात्मिक अवस्था पर विस्तृत चर्चा दर्ज है।
इस प्रकार सूफी साधना में ध्यान एवं श्वास-नियंत्रण + एकांत तपस्या + समा द्वारा आध्यात्मिक परमानंद, तीनों का स्थान था।