Previous Year Question
भारत की धार्मिक प्रथाओं के संदर्भ में ‘स्थानकवासी’ सम्प्रदाय का संबंध किससे है ?
Correct Answer: B
Detailed Solution
स्थानकवासी जैन धर्म के श्वेताम्बर सम्प्रदाय की एक शाखा है। इसकी सबसे प्रमुख विशेषता यह है कि स्थानकवासी मूर्ति-पूजा और मंदिर-आधारित उपासना को स्वीकार नहीं करते। वे धार्मिक साधना और प्रवचन के लिए ‘स्थानक’ अर्थात् साधारण प्रार्थना-स्थलों का उपयोग करते हैं। इसी से ‘स्थानकवासी’ नाम बना।
इस परंपरा की ऐतिहासिक पृष्ठभूमि 15वीं शताब्दी के लोंकाशाह से जुड़ी है। लगभग 1474 ई. में अहमदाबाद के व्यापारी लोंकाशाह ने जैन धर्म में मूर्ति-पूजा का विरोध करते हुए सुधार-परंपरा प्रारंभ की। आगे चलकर इसी गैर-मूर्तिपूजक परंपरा को स्थानकवासी रूप में पहचान मिली। भारत सरकार के National Mission for Manuscripts की Tattvabodha सामग्री भी बताती है कि यह परंपरा श्वेताम्बर से मूल सिद्धांतों में बहुत अलग नहीं थी, इसलिए इसे श्वेताम्बर स्थानकवासी कहा जाता है।
इसलिए इसे बौद्ध, वैष्णव या शैव सम्प्रदाय नहीं, बल्कि जैन धर्म की श्वेताम्बर परंपरा से संबंधित समझना चाहिए।