Previous Year Question
मध्यकालीन भारत में, शब्द “फणम” किसे निर्दिष्ट करता था ?
Correct Answer: B
Detailed Solution
फणम (Fanam/Panam) मध्यकालीन भारत में एक प्रकार का सिक्का तथा मौद्रिक मूल्यवर्ग था, जिसका प्रयोग विशेष रूप से दक्षिण भारत में होता था। यह केवल किसी एक राज्य की मुद्रा नहीं थी; अलग-अलग समय में दक्षिण भारत के विभिन्न क्षेत्रों में फणम नाम के सिक्के प्रचलित रहे।
दक्षिण भारतीय सिक्का-प्रणाली के संबंध में भारत सरकार के अभिलेख में संरक्षित Sources of Indian History में वराह (Varaha) को एक प्रमुख स्वर्ण सिक्का और फणम/पणम को उसका छोटा मूल्यवर्ग बताया गया है। इसमें सामान्यतः फणम को लगभग वराह का दसवाँ भाग और उसका भार लगभग 5–6 ग्रेन बताया गया है। इससे स्पष्ट है कि ‘फणम’ वस्त्र, आभूषण या हथियार का नाम नहीं, बल्कि मुद्रा से संबंधित शब्द था।
इसकी पुष्टि केवल बाद के इतिहास-ग्रंथों से नहीं होती। 12वीं शताब्दी के काहिरा जेनिज़ा (Cairo Geniza) के व्यापारिक दस्तावेज़ में मालाबार तट के क्विलोन/कोल्लम से संबंधित व्यापारिक हिसाब में भुगतान और मूल्य की गणना फणम में दर्ज है। यह मध्यकाल के वास्तविक व्यापारिक दस्तावेज़ से प्राप्त प्रमाण है और दिखाता है कि फणम उस समय व्यवहार में प्रयुक्त मौद्रिक इकाई था।
बाद के काल में भी फणम का प्रयोग समाप्त नहीं हुआ। त्रावणकोर सहित दक्षिण भारत की विभिन्न राजनीतिक शक्तियों ने फणम जारी किए और यह व्यापार में लंबे समय तक चलता रहा।