JAGTIV · Previous Year Questions

UPSC

HISTORY · 2012

Previous Year Question

प्राचीनकालीन भारत में हुई वैज्ञानिक प्रगति के संदर्भ में निम्नलिखित में से कौन-से कथन सही हैं?

  1. प्रथम शती ईस्वी तक विभिन्न प्रकार के विशिष्ट शल्य औजारों का उपयोग आम था।

  2. तीसरी शती ईस्वी के आरम्भ तक मानव शरीर के आंतरिक अंगों का प्रत्यारोपण शुरू हो चुका था।

  3. पाँचवीं शती ईस्वी में कोण की ज्या का सिद्धांत ज्ञात था।

  4. सातवीं शती ईस्वी में चक्रीय चतुर्भुज का सिद्धांत ज्ञात था।

नीचे दिए गए कूट का प्रयोग कर सही उत्तर चुनिए:

A.
केवल 1 और 2
B.
केवल 3 और 4
C.
केवल 1, 3 और 4
D.
1, 2, 3 और 4

Correct Answer: C

Detailed Solution

कथन 1 सही माना गया है। सुश्रुत संहिता में बड़ी संख्या में विशिष्ट surgical instruments का व्यवस्थित वर्णन मिलता है। आधुनिक medical-history studies इसके अंतर्गत लगभग 120–125 प्रकार के उपकरण, जिनमें sharp और blunt instruments, catheters, probes तथा tubular instruments शामिल हैं, दर्ज करती हैं। इसलिए प्राचीन भारत में अत्यधिक specialized surgical instrumentation का अस्तित्व स्पष्ट रूप से प्रमाणित है।

लेकिन यहाँ chronology पर सावधानी जरूरी है। सुश्रुत और सुश्रुत संहिता की exact dating विवादित है, और उपलब्ध पाठ कई चरणों में विकसित हुआ। इसलिए “पहली शताब्दी ईस्वी तक आम उपयोग” को किसी एक निश्चित archaeological date की तरह नहीं पढ़ना चाहिए।

कथन 2 गलत है। प्राचीन भारतीय चिकित्सा में rhinoplasty, skin grafting, cataract surgery और अनेक अन्य surgical procedures के प्रमाण मिलते हैं, लेकिन तीसरी शताब्दी ईस्वी तक आंतरिक मानव अंगों के transplantation का विश्वसनीय ऐतिहासिक प्रमाण नहीं है। आधुनिक organ-transplant history भी ancient India के संदर्भ में Sushruta को skin grafts और reconstructive surgery से जोड़ती है, internal-organ transplantation से नहीं।

इसलिए skin graft ≠ internal organ transplant। पुराणिक या धार्मिक कथाओं में अंग अथवा सिर बदलने के प्रसंगों को वास्तविक clinical transplantation का historical evidence नहीं माना जा सकता।

कथन 3 सही है। आर्यभट्ट ने 499 ईस्वी में आर्यभटीय की रचना की। उसमें ज्या (jya/ardha-jya) से संबंधित trigonometric treatment और sine table मिलता है। इसलिए पाँचवीं शताब्दी ईस्वी में sine की अवधारणा भारतीय गणित में स्पष्ट रूप से उपलब्ध थी।

एक उपयोगी linguistic fact है: भारतीय jya बाद में Arabic transmission में परिवर्तित होते हुए Latin sinus और आधुनिक “sine” शब्द तक पहुँची। लेकिन UPSC के लिए मुख्य fact है—Aryabhata, 499 CE → jya/sine table।

कथन 4 सही है। ब्रह्मगुप्त ने 628 ईस्वी में ब्रह्मस्फुटसिद्धान्त लिखा। इसमें cyclic quadrilateral के क्षेत्रफल तथा diagonals से संबंधित महत्वपूर्ण सूत्र दिए गए हैं। इसलिए सातवीं शताब्दी में cyclic quadrilateral का mathematical treatment निश्चित रूप से प्रमाणित है।

इसलिए chronology:

सुश्रुत परंपरा → विशिष्ट surgical instruments
तीसरी शताब्दी CE → internal-organ transplant का प्रमाण नहीं
आर्यभट्ट, 499 CE → ज्या/sine
ब्रह्मगुप्त, 628 CE → cyclic quadrilateral

Continue practicing free PYQs with your JAGTIV account.