JAGTIV · Previous Year Questions

UPSC

HISTORY · 2015

Previous Year Question

भारतीय इतिहास के संदर्भ में, निम्नलिखित में से कौन-सा/से सामंती व्यवस्था का/के अनिवार्य तत्त्व है/हैं?

  1. अत्यंत सशक्त केंद्रीय राजनीतिक सत्ता और अत्यंत दुर्बल प्रांतीय अथवा स्थानीय राजनीतिक सत्ता

  2. भूमि के नियंत्रण तथा स्वामित्व पर आधारित प्रशासनिक संरचना का उदय

  3. सामंत तथा उसके अधिपति के बीच स्वामी-दास संबंध का बनना

नीचे दिए गए कूट का प्रयोग कर सही उत्तर चुनिए:

A.
केवल 1 और 2
B.
केवल 2 और 3
C.
केवल 3
D.
1, 2 और 3

Correct Answer: B

Detailed Solution

कथन 1 गलत है। सामंती व्यवस्था की मूल विशेषता अत्यंत मजबूत केंद्रीकृत सत्ता नहीं, बल्कि राजनीतिक शक्ति का विकेंद्रीकरण है। केंद्रीय शासक की प्रत्यक्ष प्रशासनिक शक्ति सीमित होती है और स्थानीय/क्षेत्रीय सामंत पर्याप्त अधिकार रखते हैं। इसलिए “अत्यंत सशक्त केंद्रीय सत्ता + अत्यंत दुर्बल स्थानीय सत्ता” सामंतवाद की प्रकृति के विपरीत है।

कथन 2 सही है। सामंती व्यवस्था में भूमि का नियंत्रण और उससे जुड़े राजस्व तथा प्रशासनिक अधिकार राजनीतिक शक्ति का महत्वपूर्ण आधार बनते हैं। प्रारंभिक मध्यकालीन भारत में भूमि-अनुदानों के साथ fiscal, administrative और कभी-कभी judicial rights के हस्तांतरण को historians ने सामंती प्रवृत्तियों के विकास से जोड़ा है। UGC-INFLIBNET भी post-Gupta व्यवस्था में land grants और राजकीय राजस्व-अधिकारों के हस्तांतरण को नई politico-economic structure के विकास से जोड़ता है।

कथन 3 सही है। सामंती व्यवस्था में एक hierarchy बनती है जिसमें अधीनस्थ सामंत या vassal किसी उच्चतर शासक/overlord की अधीनता स्वीकार करता है। इसके बदले उसे क्षेत्र या अधिकार प्राप्त हो सकते हैं और वह tribute, loyalty अथवा military service जैसे दायित्व निभाता है। इस प्रकार lord–vassal relationship सामंती राजनीतिक संरचना का एक मूल तत्व है।

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