JAGTIV · Previous Year Questions

UPSC

HISTORY · 2020

Previous Year Question

निम्नलिखित में से कौन-सा उपवाक्य, उत्तर-हर्ष-कालीन स्रोतों में प्रायः उल्लिखित ‘हुंडी’ के स्वरूप की परिभाषा बताता है?

A.
राजा द्वारा अपने अधीनस्थों को दिया गया परामर्श
B.
प्रतिदिन का लेखा-जोखा अंकित करने वाली बही
C.
विनिमय-पत्र
D.
सामंत द्वारा अपने अधीनस्थों को दिया गया आदेश

Correct Answer: C

Detailed Solution

हुंडी (Hundi) व्यापार, ऋण और धन-प्रेषण से संबंधित एक पारंपरिक भारतीय वित्तीय साधन थी। Reserve Bank of India के अनुसार हुंडियों का प्रयोग एक स्थान से दूसरे स्थान तक धन भेजने, ऋण लेने और व्यापारिक लेन-देन में bill of exchange के रूप में किया जाता था। इसलिए विकल्प C सही है।

सरल रूप में, व्यापारी को बड़ी मात्रा में सिक्के अपने साथ लेकर लंबी दूरी तय करने की आवश्यकता नहीं होती थी। वह एक स्थान पर किसी व्यापारी-बैंकर के माध्यम से हुंडी जारी करवा सकता था और दूसरे स्थान पर उसके आधार पर भुगतान कराया जा सकता था। इस कारण हुंडी ने long-distance trade और remittance को अधिक सुविधाजनक बनाया। RBI इसे भारतीय उपमहाद्वीप में विकसित credit instruments की एक महत्वपूर्ण श्रेणी बताता है।

RBI के अनुसार हुंडी technically एक लिखित, बिना शर्त भुगतान आदेश हो सकती थी, जिसमें एक व्यक्ति दूसरे व्यक्ति को किसी नामित व्यक्ति को निश्चित राशि चुकाने का निर्देश देता था। व्यवहार में अलग-अलग प्रकार की हुंडियाँ थीं और उनका उपयोग कभी bill of exchange, कभी remittance instrument और कभी indigenous banker के cheque-जैसे साधन के रूप में होता था।

एक महत्वपूर्ण chronological fact यह है कि RBI हुंडियों के सबसे व्यापक प्रयोग को 12वीं शताब्दी से जोड़ता है और बताता है कि उनका प्रयोग आगे भी लंबे समय तक जारी रहा। इसलिए “उत्तर-हर्ष काल” इस financial instrument के विकास और प्रसार के व्यापक ऐतिहासिक संदर्भ से मेल खाता है।

हुंडी → वित्तीय/साख साधन → धन-प्रेषण + ऋण + व्यापार → विनिमय-पत्र

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