Previous Year Question
प्राचीन भारत के इतिहास के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों में से कौन-सा/कौन-से सही है/हैं?
मिताक्षरा ऊंची जाति की सिविल विधि थी और दायभाग निम्न जाति की सिविल विधि थी।
मिताक्षरा व्यवस्था में, पुत्र अपने पिता के जीवनकाल में ही संपत्ति पर अधिकार का दावा कर सकते थे, जबकि दायभाग व्यवस्था में पिता की मृत्यु के उपरांत ही पुत्र संपत्ति पर अधिकार का दावा कर सकते थे।
मिताक्षरा व्यवस्था किसी परिवार के केवल पुरुष सदस्यों के संपत्ति संबंधी मामलों पर विचार करती है, जबकि दायभाग व्यवस्था किसी परिवार के पुरुष एवं महिला सदस्यों, दोनों के संपत्ति-संबंधी मामलों पर विचार करती है।
नीचे दिए गए कूट का प्रयोग कर सही उत्तर चुनिए:
Correct Answer: B
Detailed Solution
कथन 1 गलत है। मिताक्षरा और दायभाग का विभाजन ऊँची और निम्न जातियों के आधार पर नहीं था। ये हिंदू विधि की दो प्रमुख schools of law थीं। ऐतिहासिक रूप से दायभाग मुख्यतः बंगाल में प्रभावी था, जबकि मिताक्षरा भारत के अधिकांश अन्य क्षेत्रों में प्रभावी था और इसके बनारस, मिथिला, महाराष्ट्र तथा द्रविड़ जैसे उप-विद्यालय विकसित हुए। इसलिए इन्हें caste-based civil laws कहना गलत है।
कथन 2 सही है। यही दोनों systems के बीच सबसे महत्वपूर्ण differences में से एक है। मिताक्षरा में पुत्र को पैतृक/ancestral property में जन्म से ही हित प्राप्त होता था। इसलिए पिता के जीवित रहते हुए भी वह coparcenary interest रखता था। इसके विपरीत दायभाग में पुत्र को पिता के जीवनकाल में ancestral property में जन्मसिद्ध हित नहीं मिलता था; उसका अधिकार पिता की मृत्यु के बाद succession द्वारा उत्पन्न होता था। न्यायिक व्याख्याएँ इस अंतर को बहुत स्पष्ट रूप से दर्ज करती हैं।
सरल रूप में:
Mitakshara → right in ancestral property by birth
Dayabhaga → right arises after father's death
कथन 3 गलत है। यह कहना कि मिताक्षरा केवल पुरुषों की property से संबंधित था, सही नहीं है। मिताक्षरा के स्वयं के दूसरे अध्याय, खंड XI में स्त्रीधन/महिला की संपत्ति तथा उसके उत्तराधिकार पर चर्चा मिलती है। न्यायिक निर्णयों में भी Vijnaneshvara की Mitakshara से महिला की inheritance, purchase, partition आदि द्वारा प्राप्त संपत्ति संबंधी passages उद्धृत किए गए हैं। इसलिए Mitakshara को “male-property only” system कहना तथ्यात्मक रूप से गलत है।
यह confusion इसलिए होता है क्योंकि परंपरागत Mitakshara coparcenary में जन्मसिद्ध coparcenary right मुख्यतः पुरुष वंशजों का था। लेकिन “coparcenary membership” और “पूरी Mitakshara व्यवस्था किनकी संपत्ति पर विचार करती है” दो अलग बातें हैं। इसी प्रकार Dayabhaga में महिलाओं को कुछ inheritance rights मिलना इसे केवल “men and women वाला system” नहीं बनाता। मूल अंतर मुख्यतः property right by birth बनाम succession after death जैसे सिद्धांतों में था।