Previous Year Question
प्राचीन भारत की उन श्रेणियों (Guilds) के संदर्भ में, जिन्होंने देश की अर्थव्यवस्था में बहुत महत्वपूर्ण भूमिका निभाई, निम्नलिखित में से कौन-सा/से कथन सही है/हैं?
प्रत्येक श्रेणी राज्य के केंद्रीय प्राधिकरण के साथ पंजीकृत थी और राजा उन पर मुख्य प्रशासनिक प्राधिकारी था।
मजदूरी, कार्य के नियम, मानक और कीमतें श्रेणी द्वारा निर्धारित की जाती थीं।
श्रेणी के पास अपने सदस्यों पर न्यायिक शक्तियाँ थीं।
नीचे दिए गए कूट का प्रयोग कर सही उत्तर चुनिए:
Correct Answer: C
Detailed Solution
कथन 1 गलत है। प्राचीन भारतीय श्रेणियाँ राज्य से पूर्णतः अलग संस्थाएँ नहीं थीं, लेकिन उन्हें पर्याप्त आंतरिक स्वायत्तता प्राप्त थी। याज्ञवल्क्य स्मृति में राजा को श्रेणियों, गणों और अन्य समुदायों को उनके अपने धर्म अथवा स्वीकृत नियमों में बनाए रखने का निर्देश मिलता है। उसी ग्रंथ में श्रेणियों के कार्यकारी व्यक्तियों के उन निर्णयों का पालन करने की बात भी है जो समूह के हित में हों। इससे यह सिद्ध नहीं होता कि प्रत्येक श्रेणी पर राजा स्वयं मुख्य administrative authority था; इसलिए कथन जिस व्यापक रूप में दिया गया है, वह गलत है।
कथन 2 सही है। श्रेणियाँ केवल समान व्यवसाय करने वालों के समूह नहीं थीं; वे अपने शिल्प अथवा व्यापार के आंतरिक नियम और व्यावसायिक मानक निर्धारित करने वाली self-regulating institutions भी थीं। इसी व्यवस्था के अंतर्गत मजदूरी, कार्य-नियम, गुणवत्ता/मानक और कीमतों जैसे विषयों का नियमन श्रेणी स्तर पर किया जाता था।
कथन 3 सही है। श्रेणियों को अपने सदस्यों के विवादों और नियम-उल्लंघन से जुड़े मामलों में न्यायिक अथवा अर्ध-न्यायिक अधिकार प्राप्त थे। याज्ञवल्क्य स्मृति में श्रेणी का एक मान्य corporate body के रूप में उल्लेख मिलता है, जबकि UGC-INFLIBNET के विधि-अध्ययन में Śreṇi और Puga को न्यायिक निकायों/न्यायालयों के रूप में स्पष्ट रूप से दर्ज किया गया है।