Previous Year Question
निम्नलिखित में से किस शासक ने अपनी प्रजा को इस अभिलेख के माध्यम से परामर्श दिया?
“कोई भी व्यक्ति जो अपने संप्रदाय को महिमा-मंडित करने की दृष्टि से अपने धार्मिक संप्रदाय की प्रशंसा करता है या अपने संप्रदाय के प्रति अत्यधिक भक्ति के कारण अन्य संप्रदायों की निंदा करता है, वह अपितु अपने संप्रदाय को गंभीर रूप से हानि पहुँचाता है।”
Correct Answer: A
Detailed Solution
यह कथन सम्राट अशोक के बारहवें प्रमुख शिलालेख (Major Rock Edict XII) की विचारधारा से लिया गया है। इसमें विभिन्न धार्मिक संप्रदायों के बीच सम्मान, वाणी में संयम और धार्मिक सौहार्द पर विशेष बल दिया गया है।
बारहवें प्रमुख शिलालेख का मूल संदेश यह है कि मनुष्य को बिना उचित कारण अपने ही संप्रदाय की प्रशंसा और दूसरे संप्रदाय की निंदा नहीं करनी चाहिए। ऐसा करने से अपने धर्म की उन्नति नहीं होती, बल्कि अंततः अपने ही संप्रदाय को हानि पहुँचती है। National Museum के Ashokan Rock Edict record में Edict XII का सार स्पष्ट रूप से वाणी के संयम तथा अपने धर्म की प्रशंसा और दूसरे धर्म की निंदा से बचने के रूप में दिया गया है।
अशोक की इस नीति का उद्देश्य सभी धार्मिक परंपराओं को एक जैसा बना देना नहीं था। इसके बजाय वह चाहता था कि अलग-अलग संप्रदाय एक-दूसरे को सुनें, समझें और सम्मान दें। इसलिए अशोक का धम्म धार्मिक सह-अस्तित्व और सामाजिक सद्भाव को महत्व देता था।
यह प्रश्न इसलिए विशेष रूप से महत्वपूर्ण है क्योंकि यह अशोक के धम्म को केवल बौद्ध धर्म के प्रचार के रूप में देखने की गलती से बचाता है। उसके अभिलेख ब्राह्मणों, श्रमणों तथा विभिन्न संप्रदायों के प्रति सम्मान और नैतिक आचरण पर भी बल देते हैं।