JAGTIV · Previous Year Questions

UPSC

HISTORY · 2012

Previous Year Question

भगवान बुद्ध की प्रतिमा कभी-कभी एक हस्त मुद्रा युक्त दिखाई गई है, जिसे ‘भूमिस्पर्श मुद्रा’ कहा जाता है। यह किसका प्रतीक है?

A.
मार पर दृष्टि रखने एवं अपने ध्यान में विघ्न डालने से मार को रोकने के लिए बुद्ध का धरती का आह्वान
B.
मार के प्रलोभनों के बावजूद अपनी शुचिता और शुद्धता का साक्षी होने के लिए बुद्ध का धरती का आह्वान
C.
बुद्ध का अपने अनुयायियों को स्मरण कराना कि वे सभी धरती से उत्पन्न होते हैं और अन्ततः धरती में विलीन हो जाते हैं, अतः जीवन संक्रमणशील है
D.
इस संदर्भ में दोनों ही कथन A एवं B सही हैं

Correct Answer: B

Detailed Solution

भूमिस्पर्श मुद्रा बुद्ध के ज्ञान-प्राप्ति से ठीक पहले मार पर विजय से संबंधित है। बौद्ध परंपरा के अनुसार जब सिद्धार्थ बोधिवृक्ष के नीचे ध्यानस्थ थे, तब मार ने उनके बुद्धत्व प्राप्त करने के अधिकार को चुनौती दी। सिद्धार्थ ने अपने दाएँ हाथ से पृथ्वी का स्पर्श करके धरती को अपने पुण्यों और बुद्धत्व प्राप्त करने की पात्रता का साक्षी बनाया।

इस कथा में मार और उसकी शक्तियाँ सिद्धार्थ को उनके ध्यान और ज्ञान-प्राप्ति के मार्ग से हटाने का प्रयास करती हैं। जब मार ने उनके आसन पर अधिकार का दावा किया और अपने पक्ष में साक्षी प्रस्तुत किए, तब सिद्धार्थ ने पृथ्वी को साक्षी के रूप में बुलाया। पृथ्वी ने उनके पक्ष में साक्ष्य दिया और मार की पराजय हुई। इसके पश्चात सिद्धार्थ ने संबोधि प्राप्त की।

इसलिए विकल्प A गलत है। बुद्ध ने पृथ्वी को मार पर निगरानी रखने के लिए नहीं बुलाया था।

विकल्प B सही है। प्रश्न की भाषा में यह बुद्ध द्वारा मार के प्रलोभनों और चुनौती के बावजूद अपनी शुचिता/पुण्य और आध्यात्मिक पात्रता के लिए पृथ्वी को साक्षी बनाने को दर्शाता है।

विकल्प C गलत है। भूमिस्पर्श मुद्रा जीवन की क्षणभंगुरता या मनुष्य के पृथ्वी में पुनः विलीन होने का प्रतीक नहीं है।

मुद्रा की आकृति में सामान्यतः बायाँ हाथ गोद में रहता है और दायाँ हाथ नीचे पृथ्वी को स्पर्श करता है। IGNCA इसे Buddha's earth-touching gesture के रूप में वर्णित करता है, जिसमें पृथ्वी को उनके शुभ कर्मों का साक्षी बनाया जाता है।

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