Previous Year Question
प्राचीन भारतीय इतिहास के संदर्भ में, निम्नलिखित में से कौन-सा/से बौद्ध धर्म और जैन धर्म दोनों में समान रूप से विद्यमान था/थे?
तप और भोग की अति का परिहार
वेद-प्रामाण्य के प्रति अनास्था
कर्मकाण्डों की फलवत्ता का निषेध
निम्नलिखित कूटों के आधार पर सही उत्तर चुनिए:
Correct Answer: B
Detailed Solution
कथन 1 गलत है। बुद्ध ने तपस्या और इन्द्रिय-सुख—दोनों अतियों को अस्वीकार करते हुए मध्यम मार्ग प्रतिपादित किया। धम्मचक्कप्पवत्तन सुत्त में इन दोनों extremes से बचने का स्पष्ट निर्देश मिलता है। इसके विपरीत जैन परंपरा, विशेषकर जैन मुनि-जीवन, कठोर तप, उपवास और आत्म-संयम को मुक्ति के महत्वपूर्ण साधनों में रखती है। इसलिए “तप और भोग की अति का परिहार” दोनों धर्मों की समान विशेषता नहीं है।
कथन 2 सही है। बौद्ध धर्म और जैन धर्म दोनों ने वेदों को सर्वोच्च अथवा अचूक धार्मिक प्रमाण के रूप में स्वीकार नहीं किया। महावीर ने वेदों की authority को अस्वीकार किया, जबकि बुद्ध ने भी वेदों की infallibility तथा ब्राह्मणीय धार्मिक authority को स्वीकार नहीं किया। इसी कारण दोनों को व्यापक श्रमण परंपरा में रखा जाता है।
कथन 3 सही है। दोनों परंपराओं ने मोक्ष या आध्यात्मिक उन्नति के लिए जटिल वैदिक कर्मकाण्डों और यज्ञों की अनिवार्य फलवत्ता को अस्वीकार किया। जैन धर्म ने वैदिक rituals को नकारते हुए तप और नैतिक अनुशासन पर बल दिया, जबकि बुद्ध ने elaborate rituals और पशु-बलि की आलोचना कर आचरण, ध्यान और ज्ञान को महत्व दिया।