JAGTIV · Previous Year Questions

UPSC

HISTORY · 2013

Previous Year Question

निम्नलिखित में से कौन-सा/से कथन जैन सिद्धान्त के अनुरूप है/हैं?

  1. कर्म को विनष्ट करने का सुनिश्चित मार्ग तपश्चर्या है।

  2. प्रत्येक वस्तु में, चाहे वह सूक्ष्मतम कण हो, आत्मा होती है।

  3. कर्म आत्मा का विनाशक है और अवश्य इसका अन्त करना चाहिए।

नीचे दिए गए कूट का प्रयोग कर सही उत्तर चुनिए:

A.
केवल 1
B.
केवल 2 और 3
C.
केवल 1 और 3
D.
1, 2 और 3

Correct Answer: D

Detailed Solution

कथन 1 सही है। जैन दर्शन में आत्मा से बंधे कर्मों के क्षय को निर्जरा (Nirjarā) कहा जाता है। तत्त्वार्थसूत्र 9.3 में स्पष्ट सूत्र है—“तपसा निर्जरा च”, अर्थात तप के द्वारा कर्मों की निर्जरा भी होती है। इसलिए तपश्चर्या जैन कर्म-सिद्धांत में कर्म-क्षय का प्रत्यक्ष साधन है।

कथन 2 अभिप्रेत जैन सिद्धान्त के संदर्भ में सही है। जैन दर्शन जीवन को केवल मनुष्य, पशु या वनस्पति तक सीमित नहीं करता। इसमें अत्यंत निम्न स्तर के एकेंद्रिय जीव भी स्वीकार किए गए हैं, जिनमें पृथ्वीकायिक, जलकायिक, अग्निकायिक, वायुकायिक और वनस्पतिकायिक जीव शामिल हैं। INFLIBNET के जैन दर्शन संबंधी अकादमिक विवरण में भी सबसे निम्न स्तर के जीवों को पृथ्वी, जल, अग्नि और वायु से संबंधित शरीरों में निवास करने वाला बताया गया है।

यहाँ एक महत्वपूर्ण सूक्ष्म अंतर समझना आवश्यक है। कथन “प्रत्येक वस्तु...में आत्मा होती है” जैन धर्म की अत्यंत व्यापक life-conception को व्यक्त करता है; इसे शाब्दिक रूप से यह नहीं समझना चाहिए कि प्रत्येक भौतिक कण स्वयं आत्मा ही है। जैन दर्शन स्पष्ट रूप से जीव और अजीव दोनों को स्वीकार करता है। Matter, space और time आदि अजीव हैं। इसलिए doctrinal precision में “जीवन का विस्तार सूक्ष्म और elemental forms तक” कहना अधिक सही है।

कथन 3 सही है। जैन दर्शन में कर्म केवल नैतिक action का abstract फल नहीं, बल्कि आत्मा को बाँधने वाले karmic matter के रूप में भी समझा जाता है। कर्म आत्मा के स्वाभाविक ज्ञान और शुद्धता को बाधित करता है तथा उसे जन्म-मरण के बंधन में रखता है। इसलिए मुक्ति के लिए पहले नए कर्म के आगमन को रोकना (संवर), फिर पहले से बंधे कर्मों को हटाना (निर्जरा) आवश्यक है।

इसलिए तीनों कथनों को एक क्रम में समझा जा सकता है:

कर्म का बंधन → आत्मा की शुद्धता में बाधा → संवर → निर्जरा → कर्मों से पूर्ण मुक्ति

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