JAGTIV · Previous Year Questions

UPSC

HISTORY · 2013

Previous Year Question

निम्नलिखित में से कौन-सा एक बौद्ध मत में निर्वाण की अवधारणा की सर्वश्रेष्ठ व्याख्या करता है?

A.
तृष्णारूपी अग्नि का शमन
B.
स्वयं की पूर्णतः अस्तित्वहीनता
C.
परमानन्द एवं विश्राम की स्थिति
D.
धारणातीत मानसिक अवस्था

Correct Answer: A

Detailed Solution

विकल्प A सही है। बौद्ध दर्शन में निर्वाण का संबंध तृष्णा, लोभ, द्वेष और मोह के निरोध से है। प्रारंभिक बौद्ध ग्रंथ संयुक्त निकाय 38.1 — निब्बानपञ्ह सुत्त में सारिपुत्त से निर्वाण का अर्थ पूछे जाने पर उत्तर दिया गया है कि राग, द्वेष और मोह का क्षय ही निर्वाण है।

‘निर्वाण’ के साथ अग्नि के बुझने या शमन का बिंब भी सीधे जुड़ा हुआ है। इसी कारण “तृष्णारूपी अग्नि का शमन” निर्वाण की अवधारणा की सर्वश्रेष्ठ व्याख्या करता है। इसका आशय केवल किसी एक इच्छा को दबाना नहीं, बल्कि उस तृष्णा और आसक्ति के मूल का अंत है जो दुःख और संसार-चक्र को बनाए रखती है।

विकल्प B गलत है। निर्वाण को “स्वयं की पूर्णतः अस्तित्वहीनता” या self-annihilation कहना उचित नहीं है। बौद्ध दर्शन स्थायी, अपरिवर्तनशील आत्मा की धारणा को स्वीकार नहीं करता; इसलिए निर्वाण किसी पहले से विद्यमान शाश्वत आत्मा के विनाश की प्रक्रिया नहीं है।

विकल्प C निर्वाण से जुड़ी शांति की ओर संकेत करता है, लेकिन उसकी सर्वश्रेष्ठ परिभाषा नहीं है। निर्वाण को शांति और दुःख-निरोध से जोड़ा जाता है, पर प्रारंभिक बौद्ध पाठ इसे अधिक मूल रूप से राग, द्वेष और मोह के क्षय से परिभाषित करता है।

विकल्प D भी सही परिभाषा नहीं है। निर्वाण अत्यंत गहन आध्यात्मिक अवस्था है, लेकिन बौद्ध ग्रंथ इसे केवल “धारणातीत मानसिक अवस्था” नहीं कहते; उसके कारण और प्राप्ति का मार्ग स्पष्ट रूप से बताया गया है। संयुक्त निकाय 38.1 निर्वाण की प्राप्ति के मार्ग के रूप में आर्य अष्टांगिक मार्ग भी बताता है।

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