Previous Year Question
भारत के धार्मिक इतिहास के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
बोधिसत्त्व की अवधारणा बौद्ध धर्म के हीनयान संप्रदाय का केंद्रीय तत्व है।
बोधिसत्त्व वह करुणामय व्यक्ति है जो ज्ञानोदय की ओर अग्रसर है।
बोधिसत्त्व सभी चेतन प्राणियों को मुक्ति के मार्ग पर सहायता पहुँचाने के लिए अपनी स्वयं की मुक्ति को विलंबित करता है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से सही हैं?
Correct Answer: B
Detailed Solution
कथन 1 गलत है। बोधिसत्त्व आदर्श विशेष रूप से महायान बौद्ध धर्म की केंद्रीय अवधारणाओं में से एक है। महायान में बोधिसत्त्व केवल व्यक्तिगत निर्वाण प्राप्त करने वाला साधक नहीं, बल्कि समस्त प्राणियों के कल्याण और उनके दुःख-निवारण के लिए बुद्धत्व की दिशा में आगे बढ़ने वाला साधक है। हीनयान/प्रारंभिक निकाय बौद्ध परंपराओं में बोधिसत्त्व की धारणा पूरी तरह अनुपस्थित नहीं थी—स्वयं बुद्ध के पूर्वजन्मों के लिए Bodhisatta शब्द मिलता है—लेकिन वह वहाँ महायान जैसा सार्वभौमिक केंद्रीय साधना-आदर्श नहीं था।
कथन 2 सही है। महायान बोधिसत्त्व की पहचान प्रज्ञा और करुणा दोनों से होती है। उसका लक्ष्य सर्वोच्च सम्यक् सम्बोधि प्राप्त करना है, लेकिन उसकी साधना का आधार केवल अपना कल्याण नहीं, बल्कि सभी प्राणियों के हित और सुख की भावना है। मूल संस्कृत बौद्ध सामग्री में भी बोधिचित्त को सभी प्राणियों के हित, सुख और अंततः बुद्ध-बोधि की ओर स्थापित करने की आकांक्षा से जोड़ा गया है।
कथन 3 भी सही है। महायान आदर्श में बोधिसत्त्व करुणा के कारण केवल अपनी व्यक्तिगत मुक्ति को अंतिम लक्ष्य नहीं बनाता। वह अन्य चेतन प्राणियों के दुःख-निवारण और मुक्ति के लिए कार्य करता है और पूर्ण निर्वाण में अपने अंतिम प्रवेश को स्थगित करने की धारणा से जुड़ा है। IGNCA के विवरण में भी Mahayana Bodhisattva के बारे में स्पष्ट है कि वह पूर्ण निर्वाण में प्रवेश को स्थगित करता है।
यहाँ एक महत्वपूर्ण सूक्ष्म अंतर है: कथन 3 में प्रयुक्त “delays achieving his own salvation” को शाब्दिक रूप से यह नहीं समझना चाहिए कि बोधिसत्त्व ज्ञानोदय ही नहीं चाहता। वास्तव में उसका लक्ष्य अनुत्तर सम्यक् सम्बोधि है; वह करुणा के कारण दूसरों के कल्याण को अपनी साधना से अभिन्न मानता है और अंतिम निर्वाण को केवल निजी मुक्ति के रूप में नहीं देखता।