JAGTIV · Previous Year Questions

UPSC

HISTORY · 2020

Previous Year Question

भारत के धार्मिक इतिहास के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:

  1. स्थविरवादी (Sthaviravadins) महायान बौद्ध धर्म से संबंधित थे।

  2. लोकोत्तरवाद (Lokottaravada) संप्रदाय, बौद्ध धर्म के महासांघिक (Mahasanghika) संप्रदाय की एक शाखा था।

  3. महासांघिकों द्वारा बुद्ध के देवत्वकरण ने महायान बौद्ध धर्म के विकास को प्रोत्साहित किया।

उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?

A.
1 और 2
B.
2 और 3
C.
केवल 3
D.
1, 2 और 3

Correct Answer: B

Detailed Solution

कथन 1 गलत है। स्थविरवाद और महासांघिक बौद्ध संघ के प्रारंभिक विभाजन से संबंधित परंपराएँ थीं। स्थविरवादी परंपरा को महायान की शाखा कहना सही नहीं है। बौद्ध संघ के प्रारंभिक इतिहास में Sthavira और Mahasanghika को अलग निकायों के रूप में रखा जाता है; महायान का विकास बाद की प्रक्रिया है।

यहाँ एक सावधानी जरूरी है: प्राचीन Sthaviravada को सीधे आधुनिक Theravada के बिल्कुल समान मान लेना भी oversimplification होगा। आधुनिक Theravada की ऐतिहासिक जड़ें Sthavira lineage में हैं, लेकिन प्रारंभिक बौद्ध संप्रदायों का विकास अधिक जटिल था।

कथन 2 सही है। इसके लिए हमारे पास अत्यंत मजबूत मूल ग्रंथीय प्रमाण है। Mahāvastu के संस्कृत पाठ के प्रारंभ में स्वयं इसे “Ārya-Mahāsāṃghikānāṃ Lokottaravādināṃ” परंपरा से संबंधित बताया गया है। अर्थात Lokottaravadins महासांघिक परंपरा से संबंधित थे।

Mahāvastu इस प्रश्न के लिए विशेष रूप से उपयोगी है, क्योंकि यह किसी आधुनिक historian की केवल secondary classification नहीं है; इसके textual heading में ही Mahasanghika–Lokottaravada संबंध मिलता है।

कथन 3 सही है। महासांघिक परंपराओं में बुद्ध की प्रकृति को सामान्य मानव-शिक्षक से कहीं अधिक लोकातीत (lokottara), असाधारण और अतिमानवीय रूप में प्रस्तुत करने की प्रवृत्ति विकसित हुई। Mahāvastu में स्वयं बुद्ध के शरीर, आचरण तथा गुणों को बार-बार lokottara कहा गया है। यह उस Buddha-conception का महत्वपूर्ण textual evidence है जो आगे महायान में और अधिक विकसित दिखाई देता है।

महायान में बुद्ध की अवधारणा और अधिक व्यापक हुई—Buddha को केवल ऐतिहासिक शिक्षक तक सीमित न रखकर transcendent तथा cosmic dimensions दिए गए, और Bodhisattvas भी अत्यधिक महत्वपूर्ण हुए। इसलिए महासांघिकों की ऐसी प्रवृत्तियों को महायान के विकास की महत्वपूर्ण पूर्वपीठिका माना गया है।

इसका अर्थ यह नहीं कि “Mahasanghika से ही सीधे Mahayana पैदा हुआ” और महायान का केवल एक ही स्रोत था। महायान का उद्भव एक लंबी और जटिल ऐतिहासिक प्रक्रिया थी। प्रश्न में कथन 3 को उस व्यापक intellectual continuity के संदर्भ में सही माना गया है।

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