Previous Year Question
भारत के सांस्कृतिक इतिहास के संदर्भ में निम्नलिखित में से कौन-सा ‘पारमिता (Paramitas)’ शब्द का सही वर्णन है?
Correct Answer: C
Detailed Solution
पारमिता बौद्ध परंपरा में ‘पूर्णता’ या spiritual perfection को दर्शाती है, जिसे बोधिसत्त्व बुद्धत्व की दिशा में विकसित करता है। यह केवल बाद की व्याख्या नहीं है; इसका स्पष्ट प्रमाण मूल बौद्ध संस्कृत ग्रंथों में मिलता है।
Digital Sanskrit Buddhist Canon में उपलब्ध Bodhisattvabhūmi के मूल संस्कृत पाठ में स्पष्ट कहा गया है कि बोधिसत्त्व क्रमशः छः पारमिताओं को पूर्ण करके अनुत्तर सम्यक् सम्बोधि की ओर बढ़ता है। उसी पाठ में छह पारमिताएँ स्पष्ट रूप से दी गई हैं:
दान पारमिता — Dāna — उदारता/दान
शील पारमिता — Śīla — नैतिक आचरण
क्षान्ति पारमिता — Kṣānti — धैर्य/सहनशीलता
वीर्य पारमिता — Vīrya — प्रयास/ऊर्जा
ध्यान पारमिता — Dhyāna — ध्यान
प्रज्ञा पारमिता — Prajñā — ज्ञान/प्रज्ञा
इसका एक और मूल textual confirmation Prajñāpāramitā साहित्य में मिलता है। Göttingen के academic Sanskrit corpus में संरक्षित पाठ में बोधिसत्त्व के लिए prajñāpāramitā, dhyānapāramitā, vīryapāramitā, kṣāntipāramitā, śīlapāramitā और dānapāramitā में प्रशिक्षण का स्पष्ट उल्लेख है।
IGNCA, भारत सरकार की संस्था, भी Bodhisattva practice के संदर्भ में paramitas को perfections बताती है। महायान परंपरा में छह के अतिरिक्त चार और—उपाय, प्रणिधान, बल और ज्ञान—जोड़कर दस पारमिताओं की सूची भी मिलती है। इसलिए अलग-अलग Buddhist traditions में छह और दस दोनों प्रकार की lists मिल सकती हैं; लेकिन मूल concept वही है—Bodhisattva की spiritual perfections।
विकल्प A गलत है। सूत्र-शैली में धर्म और सामाजिक आचरण के नियम प्रस्तुत करने वाले प्रारंभिक ग्रंथ धर्मसूत्र कहलाते हैं। UGC-INFLIBNET इस परंपरा में विशेष रूप से आपस्तम्ब धर्मसूत्र और गौतम धर्मसूत्र का अध्ययन करता है। इन्हें ‘पारमिता’ नहीं कहा जाता।
विकल्प B गलत है। वेद की authority को स्वीकार न करने वाली philosophical traditions के लिए भारतीय दर्शन में नास्तिक दर्शन की श्रेणी प्रयुक्त होती है। INFLIBNET स्पष्ट रूप से Āstika को Veda की authority स्वीकार करने और Nāstika को उसे स्वीकार न करने वाली philosophical traditions के रूप में विभाजित करता है।
विकल्प D भी गलत है। व्यापारी संघों के लिए śreṇi/guild जैसे पद मिलते हैं; INFLIBNET के दक्षिण भारतीय इतिहास संबंधी अध्ययन में व्यापारियों के संगठित व्यापारिक संघों को śreṇis कहा गया है। इसका pāramitā से कोई संबंध नहीं है।
इसलिए इस प्रश्न का सबसे महत्वपूर्ण conceptual link है:
Pāramitā → Perfection → Bodhisattva Path → Buddhahood