JAGTIV · Previous Year Questions

UPSC

HISTORY · 2022

Previous Year Question

भारतीय इतिहास के संदर्भ में निम्नलिखित ग्रंथों पर विचार कीजिए:

  1. नेट्टिपकरण (Nettipakarana)

  2. परिशिष्टपर्वन् (Parishishtaparvan)

  3. अवदानशतक (Avadanashataka)

  4. त्रिषष्टिलक्षण महापुराण (Trishashtilakshana Mahapurana)

उपर्युक्त में से कौन-से जैन ग्रंथ हैं?

A.
1, 2 और 3
B.
केवल 2 और 4
C.
1, 3 और 4
D.
2, 3 और 4

Correct Answer: B

Detailed Solution

1. नेट्टिपकरण — जैन ग्रंथ नहीं है। यह बौद्ध पाली परंपरा से संबंधित ग्रंथ है। Göttingen University के GRETIL में उपलब्ध इसका electronic मूल पाठ Sri Lanka Tripitaka Project से लिया गया है। ग्रंथ की शुरुआत ही बुद्ध को प्रणाम—“Namo tassa bhagavato arahato sammā sambuddhassa”—से होती है और आगे बुद्ध के sāsana अर्थात उपदेश की व्याख्या की पद्धति प्रस्तुत की गई है। इसलिए इसकी Buddhist textual identity सीधे मूल पाठ से स्पष्ट होती है।

2. परिशिष्टपर्वन् — जैन ग्रंथ है। इसे जैन आचार्य हेमचंद्र ने लिखा था। UGC के INFLIBNET e-PG Pathshala में Parisishtaparvan को स्पष्ट रूप से Jain work of Hemachandra बताया गया है तथा इसे मौर्य इतिहास, चंद्रगुप्त और जैन परंपरा के अध्ययन के साहित्यिक स्रोतों में रखा गया है।

3. अवदानशतक — जैन ग्रंथ नहीं, बौद्ध ग्रंथ है। Göttingen University के GRETIL में इसका मूल संस्कृत पाठ उपलब्ध है, जो P. L. Vaidya तथा J. S. Speyer के critical editions पर आधारित है। ग्रंथ के आरंभ में ही Buddho Bhagavān, Bhikṣusaṅgha, Rājagṛha और Veṇuvana जैसे स्पष्ट बौद्ध संदर्भ मिलते हैं। अतः इसे जैन साहित्य में रखना गलत होगा।

4. त्रिषष्टिलक्षण महापुराण — जैन ग्रंथ है। इसका पूर्ण नाम Triṣaṣṭi-lakṣaṇa-mahāpurāṇa-saṃgraha, संक्षेप में Mahapurana, मिलता है। भारतीय ज्ञानपीठ के digitised संस्करण की प्रस्तावना इसे जिनसेन और गुणभद्र की प्रसिद्ध संस्कृत जैन कृति बताती है। इसमें जैन परंपरा के तीर्थंकरों, चक्रवर्तियों तथा अन्य शलाकापुरुषों के चरित्रों का वर्णन है।

इसकी Jain affiliation की स्वतंत्र पुष्टि IGNCA के सामग्री-संग्रह से भी होती है, जहाँ जिनसेनकृत महापुराण का उल्लेख जैन ग्रंथों और जैन तीर्थंकर परंपरा के संदर्भ में किया गया है।

अतः:

Nettipakarana → Buddhist
Parishishtaparvan → Jaina
Avadanashataka → Buddhist
Trishashtilakshana Mahapurana → Jaina

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