Previous Year Question
भारतीय इतिहास के संदर्भ में निम्नलिखित युग्मों पर विचार कीजिए:
ऐतिहासिक व्यक्ति | किस रूप में जाने जाते हैं |
1. आर्यदेव | जैन विद्वान |
2. दिङ्नाग | बौद्ध विद्वान |
3. नाथमुनि | वैष्णव विद्वान |
उपर्युक्त में से कितने युग्म सही सुमेलित हैं?
Correct Answer: C
Detailed Solution
युग्म 1 गलत है। आर्यदेव (Āryadeva) जैन विद्वान नहीं, बल्कि बौद्ध दार्शनिक थे। वे लगभग तीसरी शताब्दी ईस्वी के प्रमुख Madhyamaka Buddhist philosopher थे और परंपरा में नागार्जुन के शिष्य माने जाते हैं। उनकी प्रसिद्ध रचना Catuḥśataka (Four Hundred Verses) है। Oxford Academic उन्हें प्रारंभिक भारतीय Madhyamaka दर्शन के विकास का केंद्रीय व्यक्तित्व बताता है।
यहाँ trap स्पष्ट है: आर्यदेव ने अपने ग्रंथों में जैन सहित अन्य दार्शनिक मतों की आलोचना की, लेकिन इससे वे जैन विद्वान नहीं हो जाते। वे स्वयं बौद्ध Madhyamaka परंपरा से संबंधित थे।
युग्म 2 सही है। दिङ्नाग (Dignāga) एक प्रमुख बौद्ध दार्शनिक, तर्कशास्त्री और ज्ञानमीमांसक थे। वे लगभग पाँचवीं–छठी शताब्दी ईस्वी में हुए और भारतीय बौद्ध logic तथा epistemology के विकास में निर्णायक भूमिका निभाई।
दिङ्नाग की सबसे महत्वपूर्ण कृतियों में Pramāṇasamuccaya शामिल है। उन्होंने ज्ञान के वैध साधनों के रूप में मुख्यतः प्रत्यक्ष (perception) और अनुमान (inference) का व्यवस्थित विश्लेषण किया। उनके कार्य ने बाद के प्रसिद्ध बौद्ध दार्शनिक धर्मकीर्ति के लिए आधार तैयार किया।
इसलिए Dignāga — Buddhist Scholar सही सुमेलित है।
युग्म 3 भी सही है। नाथमुनि (Nāthamuni) वैष्णव, विशेषकर श्रीवैष्णव परंपरा के प्रमुख आचार्य थे। उन्हें आलवार संतों के तमिल भक्ति-गीतों को एकत्र और व्यवस्थित करने वाली परंपरा से जोड़ा जाता है। यही संग्रह आगे Nālāyira Divya Prabandham, अर्थात लगभग चार हजार तमिल वैष्णव भक्ति-पदों के corpus के रूप में प्रसिद्ध हुआ। Concise Oxford Dictionary of World Religions भी Nāthamuni को इस महत्वपूर्ण वैष्णव anthology का collector बताता है।
इसलिए तीनों को इस प्रकार याद कर सकते हैं:
Āryadeva → Buddhist Madhyamaka philosopher — Pair 1 गलत
Dignāga → Buddhist logician/philosopher — Pair 2 सही
Nāthamuni → Vaishnava/Sri Vaishnava scholar — Pair 3 सही