JAGTIV · Previous Year Questions

UPSC

HISTORY · 2012

Previous Year Question

प्रारंभिक वैदिक आर्यों का धर्म मुख्यतः किस पर आधारित था?

A.
भक्ति
B.
मूर्ति-पूजा और यज्ञ
C.
प्रकृति की पूजा और यज्ञ
D.
प्रकृति की पूजा और भक्ति

Correct Answer: C

Detailed Solution

प्रारंभिक वैदिक अथवा ऋग्वैदिक धार्मिक जीवन की प्रमुख विशेषता प्राकृतिक और ब्रह्मांडीय शक्तियों से संबद्ध देवताओं की स्तुति तथा यज्ञ थी। इसलिए दिए गए विकल्पों में “प्रकृति की पूजा और यज्ञ” सबसे उपयुक्त उत्तर है।

ऋग्वेद में इन्द्र, अग्नि, वरुण, मरुत, उषा, सूर्य, पृथ्वी, सोम आदि अनेक देवताओं को समर्पित सूक्त मिलते हैं। भारत सरकार का Vedic Heritage Portal भी इन देवताओं को ऋग्वेद के प्रमुख देवताओं में सूचीबद्ध करता है। इनमें अग्नि अग्नि-तत्त्व, सूर्य सूर्य, उषा प्रभात तथा मरुत तूफान जैसी प्राकृतिक शक्तियों से स्पष्ट रूप से जुड़े हुए हैं।

यहाँ “nature worship” को थोड़ी सावधानी से समझना चाहिए। वैदिक देवता केवल प्राकृतिक वस्तुओं के साधारण मानवीकरण नहीं थे; उनमें नैतिक, सामाजिक और ब्रह्मांडीय भूमिकाएँ भी थीं। उदाहरण के लिए वरुण ऋत (cosmic order) से तथा इन्द्र युद्ध, शक्ति और वर्षा से भी जुड़े थे। इसलिए UPSC के विकल्प में “worship of nature” प्रारंभिक वैदिक धार्मिक व्यवस्था का एक संक्षिप्त वर्णन है।

यज्ञ का महत्व अत्यंत केंद्रीय था। इसका सीधा प्रमाण ऋग्वेद के सबसे पहले सूक्त से मिलता है। ऋग्वेद 1.1 अग्नि को समर्पित है और उसके प्रारंभिक मंत्रों में ही अग्नि को पुरोहित तथा यज्ञ से संबद्ध किया गया है। चौथे मंत्र में स्पष्ट रूप से “यज्ञम्” का उल्लेख आता है।

ऋग्वेद के अन्य सूक्तों में भी यज्ञ और सोम-अर्पण के साथ इन्द्र तथा अग्नि का आह्वान मिलता है। उदाहरण के लिए Rigveda 3.12 में Indra-Agni को यज्ञ और सोम से संबंधित रूप में आमंत्रित किया गया है। इससे स्पष्ट है कि स्तुति, मंत्र, आहुति और यज्ञ प्रारंभिक वैदिक धार्मिक व्यवहार के महत्वपूर्ण अंग थे।

विकल्प B गलत है, क्योंकि प्रारंभिक ऋग्वैदिक धर्म की मुख्य विशेषता मूर्ति-पूजा नहीं थी। उपलब्ध ऋग्वैदिक ग्रंथीय परंपरा देवताओं के लिए मंत्र, स्तोत्र और यज्ञ पर अधिक बल देती है।

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