JAGTIV · Previous Year Questions

UPSC

HISTORY · 2024

Previous Year Question

निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:

  1. उपनिषदों में कोई दृष्टांत (Parables) नहीं हैं।

  2. उपनिषदों की रचना पुराणों से पहले हुई थी।

उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?

A.
केवल 1
B.
केवल 2
C.
1 और 2 दोनों
D.
न तो 1, न ही 2

Correct Answer: B

Detailed Solution

कथन 1 गलत है। उपनिषद केवल अमूर्त दार्शनिक कथनों का संग्रह नहीं हैं; उनमें संवाद, आख्यान, उपमाएँ और allegorical teaching भी मिलती हैं। इसका स्पष्ट उदाहरण कठोपनिषद है, जिसकी कथा नचिकेता और यम के संवाद के माध्यम से आत्मा, मृत्यु और अमरत्व जैसे दार्शनिक प्रश्नों को प्रस्तुत करती है। भारत सरकार के Vedic Heritage Portal पर उपलब्ध मूल कठोपनिषद की शुरुआत ही नचिकेता की कथा से होती है।

कठोपनिषद में प्रसिद्ध रथ-रूपक भी मिलता है—शरीर को रथ, आत्मा को रथी, बुद्धि को सारथी, मन को लगाम और इन्द्रियों को घोड़ों के समान प्रस्तुत किया गया है। यह दार्शनिक सत्य समझाने के लिए प्रयुक्त स्पष्ट allegorical imagery है। इसलिए यह कहना कि उपनिषदों में कोई parable/allegorical presentation नहीं है, सही नहीं है।

छांदोग्य उपनिषद भी प्रमुख उपनिषदों में है और इसमें दार्शनिक विचार संवादात्मक तथा प्रतीकात्मक ढंग से प्रस्तुत किए गए हैं। Vedic Heritage Portal इसे वेदांत दर्शन के प्राचीन और प्रमुख स्रोतों में गिनता है।

इसलिए कथन 1 गलत है।

कथन 2 सही है — लेकिन इसे सही historical context में समझना चाहिए। प्रारंभिक अथवा Principal Upanishads उत्तर वैदिक काल से संबंधित हैं। आधुनिक scholarly chronology में बृहदारण्यक, छांदोग्य आदि सबसे पुराने उपनिषदों को लगभग 700–500 ईसा पूर्व के बीच रखा जाता है, जबकि कुछ अन्य प्रमुख वैदिक उपनिषद बाद की शताब्दियों में रचे गए।

इसके विपरीत NCERT की chronology में पुराणों के compilation को लगभग 200 ईस्वी से आगे रखा गया है। इस प्रकार प्राचीन/प्रमुख उपनिषदों की मूल रचना पुराण साहित्य के प्रमुख compilation से कई शताब्दियाँ पहले हुई।

यहाँ एक महत्वपूर्ण UPSC-level nuance है: “Upanishads” नाम वाले सभी ग्रंथ एक ही समय के नहीं हैं। Vedic Heritage Portal 108 Upanishads की पारंपरिक सूची का उल्लेख करता है, जबकि scholarly chronology में अनेक later/minor Upanishads बहुत बाद के काल में भी रचे गए। इसलिए कथन 2 को UPSC के संदर्भ में प्रमुख/प्राचीन उपनिषदों और पुराणों की मुख्य textual tradition की तुलना के रूप में समझना चाहिए।

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