Previous Year Question
ऋग्वैदिक आर्यों और सिंधु घाटी सभ्यता के लोगों की संस्कृति के बीच अंतर के संदर्भ में निम्नलिखित में से कौन-सा/से कथन सही है/हैं?
ऋग्वैदिक आर्य युद्ध में कवच और शिरस्त्राण का प्रयोग करते थे, जबकि सिंधु घाटी सभ्यता के लोगों ने इनके प्रयोग का कोई प्रमाण नहीं छोड़ा है।
ऋग्वैदिक आर्य सोना, चाँदी और ताँबा जानते थे, जबकि सिंधु घाटी के लोग केवल ताँबा और लोहा जानते थे।
ऋग्वैदिक आर्यों ने घोड़े को पालतू बनाया था, जबकि सिंधु घाटी के लोगों द्वारा इस पशु से परिचित होने का कोई प्रमाण नहीं है।
नीचे दिए गए कूट का प्रयोग कर सही उत्तर चुनिए:
Correct Answer: C
Detailed Solution
कथन 1: ऋग्वैदिक युद्ध-संस्कृति में शरीर की रक्षा के लिए कवच आदि का उल्लेख मिलता है, जबकि हड़प्पाई पुरातात्त्विक सामग्री से comparable body armour या helmet के उपयोग का स्पष्ट प्रमाण नहीं मिलता।
कथन 2: यह कहना गलत है कि सिंधु सभ्यता के लोग केवल ताँबा और लोहा जानते थे। हड़प्पाई संस्कृति एक Bronze Age civilization थी। वहाँ ताँबा और कांसा व्यापक रूप से प्रयुक्त हुए तथा सोने और चाँदी के आभूषण भी प्राप्त हुए हैं। Metropolitan Museum के archaeological overview में Harappan gold और silver jewellery का उल्लेख है, जबकि bronze और copper artefacts भी अच्छी तरह प्रमाणित हैं। दूसरी ओर, mature Harappan civilization को सामान्यतः iron-using civilization नहीं माना जाता।
इसलिए कथन 2 में वास्तव में दोनों स्तरों पर समस्या है—हड़प्पावासी सोना और चाँदी जानते थे, और लोहा उनकी characteristic metallurgy नहीं था।
कथन 3: क्योंकि घोड़ा ऋग्वैदिक संस्कृति में अत्यंत प्रमुख था। लेकिन यहाँ एक महत्वपूर्ण archaeological qualification है: हड़प्पाई स्थल सुरकोटदा से excavator J. P. Joshi की ASI report में Equus caballus के रूप में पहचानी गई घोड़े की हड्डियों की सूचना दी गई है। Gujarat Tourism का आधिकारिक विवरण भी ASI की 1990 की excavation report को उद्धृत करते हुए Surkotada से horse bones मिलने का उल्लेख करता है।
हालाँकि, इन equid remains की identification को लेकर archaeozoologists में बहस भी हुई है; प्रकाशित scholarly literature में Surkotada remains को horse मानने और उस identification पर प्रश्न उठाने—दोनों दृष्टिकोण मौजूद हैं।