Previous Year Question
यदि आर.बी.आई. नकद कोषानुपात को घटा दे तो साख सृजन पर क्या असर होगा?
Correct Answer: A
Detailed Solution
नकद आरक्षित अनुपात (Cash Reserve Ratio – CRR) घटाने पर सामान्यतः बैंकों की साख सृजन (Credit Creation) की क्षमता बढ़ती है। CRR वह निर्धारित अनुपात है जिसे Scheduled Commercial Banks को अपनी संबंधित demand and time liabilities के आधार पर RBI के पास नकद शेष के रूप में बनाए रखना होता है। RBI Act, 1934 की धारा 42 के अंतर्गत RBI को CRR निर्धारित करने का अधिकार है।
जब RBI CRR कम करता है, तो बैंकों को अपनी जमा देनदारियों का अपेक्षाकृत कम हिस्सा RBI के पास reserve के रूप में रखना पड़ता है। परिणामस्वरूप बैंकों के पास ऋण देने और अन्य अनुमत banking operations के लिए अधिक lendable resources उपलब्ध हो सकते हैं। RBI ने भी पूर्व में CRR में कटौती के प्रभाव को सीधे banks के lendable resources में वृद्धि के रूप में वर्णित किया है।
इसलिए सामान्य monetary mechanism को इस प्रकार समझ सकते हैं: CRR घटे → बैंकों के पास उपलब्ध lendable funds बढ़ें → ऋण देने की क्षमता बढ़े → credit creation की संभावना बढ़े। RBI ने भी स्पष्ट किया है कि bank liquidity requirements में ढील greater credit creation को बढ़ावा दे सकती है।
महत्वपूर्ण सावधानी: CRR कम होते ही वास्तविक बैंक ऋण स्वतः उसी अनुपात में बढ़ना आवश्यक नहीं है। वास्तविक lending पर ऋण की मांग, बैंकों की risk assessment, capital position और व्यापक आर्थिक परिस्थितियों का भी प्रभाव पड़ता है। लेकिन अन्य परिस्थितियाँ समान मानने पर CRR में कमी credit-creation capacity को बढ़ाती है।